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गनेश और मीनाक्षी – सूज़ैन का बिस्तर

गनेश और मीनाक्षी – सूज़ैन का बिस्तर

कलायन पत्रिका


गनेश और मीनाक्षी – सूज़ैन का बिस्तर

मथुरा कलौनी


 

सूज़ैन गानश, मैं तुमको खोज रही थी।*
मीनाक्षी – आओ सूज़ैन, तुम अच्छे मौके पर आर्ई।*
सूज़ैन –   मैं जब भी आती वही मौका अच्छा होता है।*
गनेश – हँू।*
मीनाक्षी हँू क्या?
गनेश मैं जब भी आती हँू,वही मौका अच्छा होता है।*
सूज़ैन ठीक है गुरु जी। मैं जब भी आती हँू,वही मौका अच्छा होता है।*
मीनाक्षी गुरु जी?
सूज़ैन ¨मैंने गानेश को अपना गुरु जी बनाया है।*
गनेश (मुँह बनाता है।) इस वाक्य में बहुत गलतियाँ हैं, सूजन।*
मीनाक्षी क्यों बेचारी का नाम बिगाड़ रहे हो! नाम *
गनेश  मैं इसको कितनी बार बता चुका हूँ कि मेरा नाम गानेश नहीं गनेश है। पर यह गानेश ही पर अटकी हुई है। अब मैंने भी तय किया है कि मैं इसे सूजन बुलाऊँगा, फिर देखता हँू इसका मुँह सूजता है कि नहीं।*
  मीनाक्षी हँसती है।*
सूज़ैन सूज़ैन क्या होता है??
मीनाक्षी थोड़ी देरी के लिए अपना हिंदी अध्याय बंद रखो। मैं जो बताने वाली थी उसे सुनो। कल गने”ा हमें बाहर खाना खिला रहा है।*
गनेश मैंने ले जाने की बात की थी, खिलाने की *
मीनाक्षी (हँसती है) ठीक है, ठीक है। तुम जैसे कंजूस से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है।*
सूज़ैन गान…गनेश, मुझे तुमसे हिंदी के बारे में बात करनी है*
गनेश ठीक है।*
सूज़ैन आज शाम को?
गनेश ठीक है।*
सूज़ैन बिस्तर में??
गनेश क्या…!!
मीनाक्षी ये क्या हो रहा है! मैं चलती हूँ।*
गनेश नहीं रुको मीनाक्षी। यह क्या बकवास कर रही हो तुम सूज़ैन?

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