| सूज़ैन |
तुम्हारे पास टाइम नहीं है तो… |
| गनेश |
तुम मुझे गुरु मानती हो और ऐसी बातें कर रही हो! तुमने मुझे समझ क्या रखा है।* |
| सूज़ैन |
मैंने क्या कहा जो तुम गुस्सा हो रहे हो।* |
| गनेश |
बिस्तर में बताने को कह रही हो और कहती हो कि मैंने क्या कहा! |
| सूज़ैन |
बिस्तर में नहीं बताओगे तो समझ में कैसे आएगा।* |
| गनेश |
फिर…फिर.. |
| मीनाक्षी |
गनेश मुझे लगता है कि यहाँ कुछ गड़बड़ है। |
| गनेश |
गनेश मुझे लगता है कि यहाँ कुछ गड़बड़ है।* |
| मीनाक्षी |
सूज़ैन तुम हिंदी बिस्तर में क्यों सीखना चाहती हो।* |
| सूज़ैन |
सूज़ैन तुम हिंदी बिस्तर में क्यों सीखना चाहती हो।* |
| मीनाक्षी |
हँसने लगती है और हँसते हँसते लोट-पोट हो जाती है।* |
| गनेश |
अब तुमको क्या हुआ! |
| मीनाक्षी |
नहीं समझे? सूज़ैन तुम्हें बिस्तर में नहीं विस्तार में बताने को कह रही है।* |
| गनेश |
विस्तार… बिस्तर… विस्तार। हे भगवान! अर्थ का अनर्थ <इसी को कहते हैं!! |