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हंसिकाएं – डा. सरोजनी प्रीतम
जड़
पेड़, जाने किस मिट्टी का बना है
जड है फिर भी तना है
प्रक्रिया
वृक्षारोपण करते समय वे रो दिये
बोले यहाँ भी वही राजनीति
जड़े जमानी हों तो पहले
गड्ढे खोदिये
हरीतिमा
हरेपन की भी क्या पकड़ है
घाव हरे हैं – शेष सब जड़ है
आ – राम
सीता ने देखा
रावण भी मन ही मन
श्री राम को प्रणाम करता है
जब भी थक कर निढाल होता है
आ-राम आ-राम
(आराम) करता है
दु:शासन
त्रिजटा ने सीताजी को
रावण की स्थिति बता दी
कि सोने की लंका में –
सब की चांदी है
अन्यान्य
रावण ने सोचा राम का रूप धारण करके
सीता के सम्मुख जाऊॅं
मन्दोदरी सोचने लगी सीता बनकर
अपने प्राणप्रिय रावण को लुभाऊॅं
माया से रूप रचा – मारीचिका सताती है
रावण चकित है
उसे सर्वत्र मन्दोदरी ही क्यों नजर आती है
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कुछ नई परिभाषाएं …….
कंट्रोल करना – होनी को कौन टाल सकता है?
विशेषज्ञ – किसी एक विशेष विषय को छोड़ कर बाकी विषयों में शून्य।*
यदि, यद्यपि – जो संभव न हो। भविष्यवक्ता का तकिया कलाम। यदि नौ मन तेल होता तो राधा अवश्य नाचती।*
चुटकुला, जोक – राजनैतिक गठबंधन*
पागल – स्वतंत्र सोचने वाला*
मनुष्य – आदमी या औरत*
आत्मा -अपदार्थ*
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