गहरा सम्बन्ध है रंगों का मानव जीवन से
ओम प्रकाश कदायन
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ओम प्रकाश कदायन
मानव जीवन में रंगों का महत्वपूर्ण स्थान है। आदिम गुफावासियों से लेकर आधुनिक मानव तक ने संसार के निर्माण में रंगों का सहारा लिया है। कमरे की रंग व्यवस्था से लेकर बाग-बगीचे में फूल पौधों की रंग येाजना तक उसने अपना हस्तक्षेप किया है, क्योंकि रंगों का अपना एक प्रभाव होता है जो मानव की मानसिक भावनाओं को उव्देलित करने की शक्ति रखता है। कलाकार रंगों को अपने विचार या मनेाभाव अभिव्यक्त करने के लिए प्रयोग करता है। रंग शब्दरहित भाषा को जन्म देते हैं। रंग ऋतुओं के मोहक श्रृंगार हैं। ये हमारे सुख, आनन्द और उत्सवों से गहरा सम्बन्ध रखते हैं। विश्व के सभी राष्ट्र रंगों की सुन्दरता एवं आवश्यकता को स्वीकार करते हैं और उत्साह के साथ इनका प्रयोग भी करते हैं। रंग सौन्दर्य के श्रेष्ठतम उपकरण हैं।
इन्द्रधनुष का मनोहरी रंगीन दृश्य देखने का किसका मन नहीं करेगा? नृत्य करते मयूर के आकर्षक रंगों वाले रंगीन पंखों को देखकर चलते पथिक के कदम रुक जाते हैं, मोर के पंखे की ये निराली छटा देखते बनती है। फूलो की रंगयुक्त सुन्दरता अनायास ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। बच्चों अैार महिलाओं का रंगीन कपड़े पहनने का बड़ा मन करता है। रंग-बिरंगे खिलौने व रंगीन चित्रों से सूसज्जित पुस्तकें बच्चों को बड़ी आकर्षित करती हैं। अत्युक्ति न होगी यदि हम कहें कि हमारे जीवन का शायद ही कोई ऐसा पहलू हो जो कि रंगों के प्रभाव से मुक्त कहा जा सके। रंगों में वह गुप्त उर्जा होती है कि वह एक अनन्त गतिशीलता प्रदान कर सकती है। अपने विचारों और भावनाओं तक को हम रंगेां के व्दारा व्यक्त करते हैं। व्यक्तिओं, घटनाओं, मन की विभिन्न अवस्थाओं, यहाँ तक कि युगन्ध और दुर्गन्ध को भी हम अनेक रंगों की सहायता से प्रयुक्त करते हैं।
पीला – पीला रंग प्रकाश, ज्योति और प्रसन्नता का द्योतक होता है। सह रंग प्रसन्नता एवं उमंग उत्पन्न करता है। इसको देखने से मन में प्रकाश और ज्ञान का भास होता है। यह भावों को प्रेरित करता है तथा बुध्दि को प्रखर बनाता है। इसे सूर्य का रंग कहा जाता है। पीले रंग के व्दारा रक्त का संचार बढ़ जाता है। देवी-देवताओं और कृत्यों के विविध आयोजनों में पीला वस्त्र अच्छा माना जाता है। पीले रंग से मन का पाप, अधर्म, अशान्ति तथा रोग भागते हैं। पीले रंग को शुध्द रुप में ही प्रयोग में लाना चाहिये। गन्दा पीला वस्त्र मनुष्य को अधर्मी तथा डरपोक बनाता है। पीला रंग पसंद करने वाला व्यक्ति सदा विकासशील व लक्ष्योन्मुख गतिविधियों में संलग्न रहता है। पीला रंग थकान दूर करने में सहायक होता है।
एक कारखाने के मजदूर, काले डिब्बे उठाने में बहुत वजनदार अनुभव करते थे। पर जब वही डिब्बे पीले रंग में रंगवा दिये गए तो श्रमिकों ने कि उनमें भार कम है। उन्हें भार उठाने में कोई कठिनाई नही होती। इन्दौर क्लब के निर्देशक ने रंगों के प्रभाव को जांचने के लिए खिलाड़ियों के वस्त्र व फुटबाल को भिन्न-भिन्न रंगों में रंगवाकर देखाकि इसका हार-जीत पर क्या प्रभाव पड़ता है? इस आधार पर किये परीक्षणेंा से पता चलता है कि पीला रंग विजय का द्योतक रहा तो लाल रंग वाला पक्ष प्राय: शिथिल रहा।
लाल – लाल रंग युध्द के देवता का रंग होता है। क्रोध व खतरे को व्यक्त करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। यह रंग स्नायुविक उत्तेजना उत्पन्न करता है अैार भावनाओं को उबारता है। इस रंग के दर्शन से मांसपेशिओं में तनाव एवं कम्पन पैदा होता है। ह्मदय की धड़कन बढ़ती है। सांस जल्दी-जल्दी चलने लगती है। लाल रंग को बार-बार देखने से हिंसात्मक वृत्तियां उत्पन्न हो जाती हैं। लाल रंग से देशभक्ति और अनुराग पैदा होता है। लाल रंग को पसंद करने वाला उत्साही, गतिशील व साहसी होता है।
नीला – नीला रंग वैज्ञानिक प्रगति वाले व्यक्ति को अच्छा लगता है। यह, व्यक्ति को मौलिक रचने व कल्पना करने की ओर प्रेरित करता है। मन को शीतल करने, क्रोध का गमन करने, एवं आंखों को आराम पहुंचाने के लिए इस रंग का उपयोग उचित है। किन्तु ध्यान रहे गन्दे नीले रंग का प्रयोग या मध्यम नीले रंग का प्रभाव इसके विपरीत गुण उत्पन्न करता है। लूशर कलर टैस्ट के अनुसार यदि कोई व्यक्ति नीले रंग का तिरस्कार करता है तो समझो के उसके मन में पारम्परिक सद्भाव व विश्वास का कमी के कारण खिन्नता उत्पन्न हो गई है। गहरा नीला रंग पसन्द करने वाले व्यक्ति बुध्दिमान, सौंदर्यमुखी व अपने जीवन के बारे में स्वयं निर्णय लेने वाले होते है। गहरा नीला रंग पूर्ण शान्ति का भी सूचक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञेंा ने रोगियों पर रंग का प्रभाव जानने के लिए जो परीक्षण किये उसमें उन्होंने पाया कि जिन रोगियों को शक्ति और शीतलता की जरुरत थी, उनके लिए नीले पड़दे और नीले रंग से पुते कमरे अधिक लाभदायक सिध्द हुए। मानसिक रोगियों को तो इससे बेइंतहा राहत महसूस हुई। वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोगों के आधार कर बताया है कि उपयुक्त रंग हमें ताजगी अैार स्फूर्ति प्रदान करते हैं जगकि अनपयुक्त रंगों से उव्दिग्नता उत्पन्न होती है और थकान बढ़ती है।
काला – काले रंगों का प्रभाव भी जी मिचलाने, चक्कर आने व ऊब जगाने जैसा देखा गया है। जिन वायुयानों और जलयानों के कमरे इस रंग से रंगे थे उनसे यात्रिओं को परेशानी रही, किन्तु जब रंग में परीवर्तन कर दिया गया तब यात्री प्रसन्नता अनुभव करने लगे। यह रंग अन्धकार, निद्रा, विरोध, भय व हिंसात्मक प्रवृत्तियां उत्पन्न करने वाला होता है। इस रंग को बार-बार देखने से भ्रम, अज्ञान तथा राक्षसीय प्रवृत्तियां जागृत होती है। राक्षसीय वृत्तियों को काले रंग से दिखाया जाता है। हिंसात्मक प्रवृत्ति उत्पन्न करने के लिए ‘काली देवी’ को काला रंगा जाता है।
हरा – यह रंग शीतलता, स्फूर्ति तथा पुन:जीवन उत्पन्न करता है। नवीन शक्ति का संचार करने के कारण यह रंग बलवर्धक होता है। यह मन को एकाग्रता प्रदान करने में सहायक सिध्द होता है। यह शीत प्रति का रंग होने के कारण मन की चंचलता और बेचैनी को दूर भगाता है। मन की गर्मी तथा शारीरिक ताप व ज्वर को कम करता है। अधिक परिश्रम करने वाले व्यक्तियों की आत्मा को इस रंग से आराम मिलता है। हरा रंग अधिक देखने से या इस रंग की चित्र में बहुलता होने से मन में शक्ति, कल्पना, खोज, नये विचार, समझने की शक्ति अपनापन तथा समृध्दि की वृध्दि होती है। परन्तु गन्दे हरे रंग का प्रभाव शत्रुता भाव बताता है। जो लोग हरा रंग पसंद करते हैं। उनमें स्वत्व की मात्रा अधिक होती है। वे स्वष्टवादी होते हैं। उनका जीवन प्रेमाश्रय होता है तथा दूसरों को प्रभावित करने की इच्छा रखता है।
बैंगनी – यह रंग शान, महत्व और राजसी प्रभाव प्रकट करता है, तथा भावनाओं को दृढ़ बनाता है। इस रंग से मन में तथा ह्मदय में उच्चतम आदर्श, मर्यादा और सत्य की खोज करने के भाव उत्पन्न होते हैं़। रेाम के वैभवकाल में ये रंग राजकीय रंग समझा जाता था। यह रंग जितना कलात्मक है उतना ही भावात्मक है, परन्तु हल्का बैंगनी रंग पश्चाताप और उदासीनता उत्पन्न करता है।
नारंगी – यह रंग शीघ्र ही चिड़चिड़ापन उत्पन्न करता है। इस रंग से जीवन की शक्ति का संचार होता है और बल की वृध्दि होती है। इस रंग को पसंद करने वाला कलात्मक कार्यों में रुचि रखता है।
श्वेत – यह रंग शान्ति, एकता, सत्यता, शुध्दता एवं उज्ज्वलता का प्रतीक है। भक्ति भावना और परमात्मा से प्रेम उत्पन्न करने वाले व्यक्ति श्वेत वस्त्र पहनना पसन्द करते हैं। विश्वबन्धुत्व और सहयोग की विचारधारा श्वेत वस्त्र धारण करने और श्वेत रंग का बार-बार दर्शन करने से होती है। इस रंग को पसन्द करने वाला धार्मिक प्रवृत्तियों व शान्तिमय जीवन व्यतीत करके जीवन की खेाज में सत्य के रास्ते पर चलता है।
बादामी – यह दृढ़़ता व संकल्प का प्रतीक है। इसे पसन्द करने वाला प्रेमी स्वभाव वाला, मित्र व हितैषी समझा जाता है।
गुलाबी – यह रंग अहंकार व स्वार्थ परायणता का प्रतीक माना जाता है।
स्लेटी – यह रंग तनाव व विश्राम का द्योतक न होकर इन्हीं दोनेां के बीच शान्ति का प्रतीक होता है। स्ल्ेटी रंगा को सर्वप्रथम चुनने वाला व्यक्ति हर प्रकार की गतिविधियों में भाग लेता है।