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ललित निबंध
भारतीय युवा – जलवायु परिवर्तन

भारतीय युवा – जलवायु परिवर्तन

भारतीय युवा – जलवायु परिवर्तन


वी. के. अग्रवाल

भारतीय युवा – जलवायु परिवर्तन 

संपूर्ण विश्व में, आज जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए अधिकतर बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक गंभीर रूप से चिंतनशील हैं. भारत में अधिकांश युवावर्ग इस समस्या की तात्कालिकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे प्रयासों से अवगत है और राष्ट्रीय स्तर पर, सहयोग की भावना से ओतप्रोत होकर समाधान के लिए जागरूकता लाने में, लोगों को संगठित करने के लिए प्रेरित हो रहा है . भेल परिसरों में भी बुनियादी जलवायु विज्ञान की जानकारी के साथ विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी सहित आगे बढ़ के प्रयत्न किये जा रहे हैं. शाशकीय कार्यान्वयन में सहयोग के लिए कार्य योजना बना कर, सफलताओं के लिए संवाद आगे बढ़ रहे हैं.

इस दिशा में अधिक कार्य करने के लिए सभी को, स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी परियोजनाओं से वाकिफ होना पड़ेगा जोकि ग्रीन हाउस गैसों को कम करके, पृथ्वी पर हीटिंग को कम करने की दिशा में काम करतीं हैं.

पनबिजली

जल विद्युत ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत सबसे बड़ा है. हमारा देश, इस अक्षय ऊर्जा बिजली के विकास के लिए अच्छा स्रोत राष्ट्र है. भारत में सकल बिजली उत्पादन का लगभग 25% हिस्सा पणबिजली के द्वारा है तथा निकट भविष्य में लगभग 50,000 मेगावाट पनबिजली उत्पादन का लक्ष्य है. हालांकि इस शक्ति क

बायोमास

बायोमास एक इलाके में सभी जैविक पदार्थ सामग्री जैसे कि लकड़ी, फसलों और फसलों का वेस्टेज, पादप खनिज का कचरा, और पशुओं से जनित कचरा माना जाता है जोकि ज्यादातर लेंड फिल्लिंग में समाप्त होता है. बायोमास और बायोमास ईंधन उत्पादों के प्रसंस्करण से पश्चिमी देशों में उर्जा उत्पादन के मामले में अच्छी प्रगति हुई है.
यह अनुमान लगाया गया है कि केवल अमेरिका में अपशिष्ट उत्पादों के 90 प्रतिशत भाग को जला दिया जा सकता है जिससे कोयले के 100 मिलियन टन के बराबर ऊर्जा पैदा कि जा सकती है. पश्चिमी यूरोप में, 200 से अधिक विद्युत संयंत्र कचरा जला कर के बिजली का उत्पादन कर रहे हैं.

जिओ थर्मल (भू- तापीय)
पृथ्वी की सतह पर, गर्म पानी से स्वाभाविक रूप से मिलने वाले भाप से टरबाइन को चलाकर उर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल होता है . इसके अलावा, गर्म पानी का इस्तेमाल सीधे इमारतों को गर्म करने के लिए किया जा सकता है. हालाँकि ये दुर्लभ हैं और इनका श्रोत खोजने के लिए मुश्किल है. परन्तु इस प्रकार की ऊर्जा विश्वसनीय है और बहुत लागत प्रभावी है .

पवन
पवन ऊर्जा, गतिज वायुमंडलीय हवा के वेग के साथ जुडी हुई ऊर्जा है. इसका नौकायन के लिए सैकड़ों वर्षों से इस्तेमाल किया जाता है. वर्तमान में पवन बिजली, बिजली के सकल उत्पादन का एक छोटा हिस्सा है. इसके इसके विकास में बड़े आकार के टर्बाइनों का प्रयोग उत्तम होगा. छोटे हवा टर्बाइनों का आमतौर पर घरों के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे कि खेतों में पानी पम्पिंग और अनाज पीसने के लिए.

सोलर (सौर)
सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है. सोलर बिजली का उत्पादन, पीवी कोशिकाओं में सूर्य के प्रकाश के द्वारा, इलेक्ट्रॉनों से उत्पन्न मुक्त परमाणुओं के द्वारा होता है. सौर उर्जा के क्षेत्र में काफी विकास कार्य हो रहे हैं. हमारे राष्ट्र में ‘सौर ऊर्जा’ एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर के आएगी. भारत संसार के कुछ उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहाँ एक अनुमान के अनुसार 1700 किलोवॉट सौर ऊर्जा प्रति वर्गमीटर प्रति वर्ष की दर से उपलब्ध है। सूर्य की यह तेजी लगभग वर्ष भर रहती है और सर्दी तथा गर्मी में इसकी तेजी में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। यहाँ बारिश के मौसम में भी कई जगह अच्छी-खासी धूप पड़ती है। इस वैकल्पिक और ताकतवर ऊर्जा का सही उपयोग कर विकास में काफी मदद मिल सकती है. सौर ऊर्जा इतनी ताकतवर है कि इससे भारत की कुल ऊर्जा इंस्टॉल्ड कैपेसिटी (लगभग एक लाख पेंसठ हजार मेगावॉट) के बराबर उर्जा 15000 वर्ग किमी क्षेत्र से प्राप्त कि जासकती है और औसतन प्रत्येक मेगावाट सौर उर्जा उत्पादन किये जाने पर 25 से 40 प्रत्यक्ष रोजगार और 400 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे.

सौर ऊर्जा विकास प्रणालियाँ:
थर्मल कॉन्सनट्रेटर -यह प्रणाली अपेक्षाकृत सस्ती पड़ती है। इसमें सूर्य की रोशनी से पानी गर्म कर भाप बनाई जाती है। यह भाप स्टीम टरबाइन को घुमाती है और उससे बिजली बनती है। इस प्रणाली पर आधारित एक बड़ा संयंत्र, 350 मेगावॉट की शक्ति का अमेरिका के केलिफ़ोर्नेआ में लगा है।
फोटो वोल्टिक -इस प्रणाली में सिलिकॉन के वैफर्स इस्तेमाल किए जाते हैं। ये मोड्यूल के रूप में इस्तेमाल होते हैं। यह सौर ऊर्जा को सीधे ही बिजली में तब्दील कर देते हैं. अभी सोलर फिल्म पर आधारित प्रणाली भी उपलब्ध हो रही हैं
हाल ही में यूरोप में, स्विस हवाईअड्डे से सौर उर्जा की मदद से उड़ने वाले एक विमान ने 24 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है. सौर विमान रात में भी आकाश में उड़ा।

जलवायु परिवर्तन पर प्राचीन भारत :
प्राचीन काल में, हमारे ऋषि मुनि – लोगों को मौसमी बदलाव होने पर उनके कर्तव्य के बारे में जागरूक बनाने के लिए लोगों को ‘यज्ञों’, आदि की जानकारी देते थे जिनका सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों पर एक बड़ा प्रभाव होता है. लगभग हर भारतीय द्वापर युग में श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी के डूबने की कहानी जानता है. भगवान श्री कृष्ण ने द्वारिका के निवासियों को सुनामी की तरह ऊँची लहरों द्वारा शहर को समुद्र के अन्दर लेजाने की जानकारी दी थी और शहर खाली करने के लिए सूचना दी थी. अब सवाल उठता है, क्या भारत में, मौसम पूर्वानुमान के बारे में महान ज्ञान था? एक और सवाल है, क्या हम जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों का मुकाबला करने में प्रयास लगा रहे हैं?
अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए भारतीय समाज की विशेष पहचान है. न्यूनतम ऊर्जा की अवधारणा हमारी परंपरागत जीवन शैली का एक हिस्सा है. इस संस्कृति में कोई ‘बर्बादी नहीं है. सतत विकास के सिद्धांत समस्त भारतीयों में है. केवल मुद्दा यह है कि हमें प्रकृति के नियमों का पालन करना चाहिए. हमारे पूर्वजों की नैतिकता, हमारे वातावरण के साथ न्यायसंगत रही है.

जलवायु परिवर्तन वर्तमान विश्व की ज्वलंत समस्या है.
जलवायु परिवर्तन के पीछे असली कारण पता होना चाहिए और तब नीतियों का फैसला किया जाना चाहिए. भारत का इस से अत्यधिक संबंध है, विशेष रूप से जहाँ तक जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का संबंध है, भारत जानकार है. तथ्य यह है कि हमें हरियाली बढ़ाने, प्रदूषण को कम करने, अपव्यय रोकने, और स्थानीय जलवायु में परिवर्तन को रोकने के लिए, सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करना चाहिए. यह हमारे युवाओं के लिए सही समय है उठें और इस दिशा में काम शुरू करें.

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