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चिराग का भूत

चिराग का भूत

कलायन पत्रिका

चिराग का भूत


प्रहसन – मथुरा कलौनी

स्थान – रास्ता

पथिक स्वगत- यह पेड़ की छाँव में कौन बैठा हुआ है।
कोई बेचारा लगता है।
किस्मत का मारा लगता है।
सूरत रोनी है। इसके साथ हुई बात कोई अनहोनी है।
जरा पूछ कर तो देखूँ क्या दुख हैे इसको।
– प्रकट- क्यों भैया क्या दुख है तुमको?
   
बेचारा कौन हो भई तुम?
पथिक मैं एक पथिक हँू। विश्राम करने के लिए इस पेड़ की छाँंव में आया।
यहाँ आ कर तुमको बैठे पाया।
सोचा पूछ कर देखूँ क्या दुख हैे तुमको।
क्यों भैया क्या दुख है तुमको?
 
बेचारा कोई एक दुख हो तो बताऊँ।
कोई एक गम हो तो सुनाऊँ।
यहाँ तो किस्सा इस तरह है कि जब से मैंने होश सम्हाला हैे,
दुखोंे को ही पाला है। मुझे पहले एक दुख मिला। उस पहले दुख से उबरा ही था कि मुझे दूसरा दुख मिला। फिर तीसरा, फिर चौथा, फिर पांॅचवांॅ। तुमको गिनती आती है।
 
पथिक आती है।
 
बेचारा पूरी गिनती गिन जाओगे तो भी मेरे दुखों का पार न पाओगे।
 
पथिक वह तो बता रही है तुम्हारी सूरत।
दुखों की बने हो तुम एक बड़ी मूरत।
चलो अपना कोई नया ताजा दुख सुनाओ।
तुम्हारा जी भी हल्का हो जाएगा, मेरा मन भी बहल जाएगा।
मैं कर लूँगा थोड़ा विश्राम और तुम को भी आएगा आराम।
 
बेचारा कहते हो तो बताता हँू। अपने गम की दास्तान सुनाता हूँ।
अभी परसों की बात है। मैं थका माँदा अपने कोलाहल निकेतन पहुँचा।
पथिक कहाँ पहुँचे?
 
बेचारा कोलाहल निकेतन।
 
पथिक वो कहाँ है?
 
बेचारा मेरा घर। मैं अपने घर को इसी नाम से बुलाता हूँ?।
 
पथिक कोलाहल निकेतन?
 
बेचारा हाँ भई कोलाहल निकेतन।
नाम तो सुना होगा तुमने शांति निकेतन ।
उसी का उल्टा है कोलाहल निकेतन।
मैं कह रहा था….. मैं क्या कह रहा था?
 
पथिक अपने घर के बारे में बता रहे थे।
 
बेचारा हाँ। मैं कह रहा था, जैसे सिर मुड़ाते ही ओले बरसते हैं,
मेरे घर में घुसते ही शोले बरसते हैं।
 
पथिक क्या तुमको मारती है?
 
बेचारा नहीं नहीं मेरी बीवी तो बहुत अच्छी है। बस गाय समझ लो।
 
पथिक गाय। गाय भी तो सींग मारती है।
 
बेचारा मेरी बीवी क्या मारेगी मुझको।
बस मेरी किस्मत ही ऐसी है कि मैं ही खा लेता हूँ उसके हाथ से मार।
कभी एक दो कभी दो चार।
परसोंे की बात बता रहा था। घर में घुसा तो…

 स्थान – घर

  पत्नी लाये या खाली हाथ मुँह उठाए चले आये। अरे कुछ बोलते क्यों नहीं ?
     
  पति पीने के लिए पानी दोगी? बहुत प्यास लगी है।
पत्नी आते ही फरमाइश। और जो मैं बक बक कर रही हँू वह कुछ नहीं। मैं पूछ रही हूँ कुछ लाये या खाली हाथ मुँह उठाए चले आये।
 
पति अरे भई कभी तो कुछ और बात करो, जब देखो वही। आए हो तो क्या लाए हो, जा रहे हो तो क्या दे के जा रहे हो।
 
पत्नी हाँ हाँ मेरी बात अब तुमको क्यों कर पसंद आएगी। मैं पूछती हँ?ू तुमने घर बसाया ही क्यों, जब परिवार की जरूरतों को पूरी करने की तुम्हारी औकात ही नहीं है।
 
पति झक मारी औेर गू खाया।
 
पत्नी मेरे घर से निकल जाओ। जब परिवार पालने लायक हो जाओ तब आना।
 
पति क्यों निकल जाऊँ। यह घर मेरा भी है।
 
पत्नी अच्छा ! मुझे मालूम है लातों के भूत बातों से थोड़े ही मानते हैं।
क्या तुम मुझे मारोगी?
 
पति नहीं नहीं तुम्हारी आरती उतारूँगी।

स्थान – रास्ता

बेचारा बीवी ने सेव मँगाए थे और मैं खाली हाथ गया था
   
पथिक यह तो तुमने गलती की। बीवी ने मँगाए थे सेव तो ले जाते सेव। यह कौन सी बड़ी बात थी। सेव ही तो माँगे थे।
 
बेचारा हाँ माँगे तो थे उसने केवल सेव।
पर मैं कहाँ से ले जाता सेव।
सेव क्या पेड़ में उगते हैं कि जब चाहो तोड़ लो। बाजार में मिलते हैं सेव। वह भी सौ रुपये किलो। और मेरे पास बस का किराया भी नहींं था तो कहाँ से ले जाता सेव।
 
पथिक क्या बीवी ने बहुत मारा। मेरे कहने का मतलब है क्या तुमने अपनी बीवी के हाथों बहुत मार खाई?
 
बेचारा हाँ आँ…फिर उसने मुझे धक्का दे कर बाहर निकाल दिया और मेरे मुँह पर दरवाजा बंद कर दिया। खटाक।
 
पथिक फिर क्या हुआ?
 
बेचारा उद्देश्यहीन, भटकता हुआ मैं यहीं आ पहुँचा। यहाँ आकर क्या देखता हँू कि उधर पत्थरों के बीच में एक चिराग दबा हुआ है। मैंने पत्थरों को हटा कर चिराग को निकाला। बहुत ही सुंदर चिराग था। उस पर धूल और मिट्टी चिपकी हुई थी। मैंने उस पर से मिट्टी हटाई और रुमाल से उसे साफ करने लगा। अभी मैं उसे रुमाल से रगड़ ही रहा था कि…..
 
जिन्न -अँगड़ाई लेता है- इस बार तो बहुत ही लंबे अरसे के बाद किसी ने चिराग को रगड़ा। अरे बापरे यह तो ट्वेंटीफस्र्ट संेचुरी है। चिराग किसने रगड़ा, कौन बना मेरा मालिक!
 
बेचारा भूत… भूत… भूत… भूत… भूत…
 
जिन्न -स्वगत- तो ये है मेरा नया मालिक।
-प्रकट- गुड इविनिंग सरकार।
 
बेचारा भूत… भूत… भूत… भूत… भूत…
 
जिन्न ओ मेरे आका.. ओ मेरे सरकार आपने मुझको बुलाया, और मैं आया।
 
बेचारा मैंने तुमको नहीं बुलाया… मैंने तुमको नहीं बुलाया।
 
जिन्न अरे कैसे नहीं बुलाया !
यह कौनसा जमाना है भाई ? कोई मुझे बुलाता और खुद भागता!
 
बेचारा भूत… भूत… भूत…
 
जिन्न डरो मत सरकार, डरो मत सर, डरो मत बडी, डरो मत बाबा, डूड।
 
बेचारा कौन हो तुम।
 
जिन्न मैं जिन्न हँू।
 
बेचारा जिन्न?
 
जिन्न हाँ जिन्न। हिंदी में भूत, उर्दू में जिन्न और अँग्रेजी में जिनी हँ?ू।
 
बेचारा भूत…भूत… बचाओ…
 
जिन्न -स्वगत-ऐसा डरपोक आदमी मैंने पहले कभी नहीं देखा।
– प्रकट- हाई डूड! मैं आपका सेवक हूँ सरकार ।
 
बेचारा मुझे बहुत खुशी हुई आपसे मिल कर।
 
जिन्न मैं आपका सेवक हूँ सरकार।
 
बेचारा भूत महाराज क्या सेवा करूँ मैं आपकी?
 
जिन्न सेवा मैं करूँगा सरकार आपकी।
 
बेचारा नहीं भूत महाराज.. भूत मालिक सेवा मैं करूँगा। उसके बाद आप मुझे छोड़ देना।
 
जिन्न -स्वगत- ये क्या हो रहा है? मैं बहुत कनफ्यूज हो गया हूँ।
– प्रकट-सरकार आप मुझे यह बतायेंे कि आपने मुझे क्यों बुलाया?
 
बेचारा यह क्या गजब कर रहे हो भूत महाराज। मेरी हिम्मत कि मैं आपको बुलाऊँ। आप विश्वास कीजिए महाराज कि मैंने आपको नहीं बुलाया। माँ कसम।
 
जिन्न अरे कैसे नहीं बुलाया! आपने उस चिराग को रगड़ा कि नहीं?
 
बेचारा मैं उसे साफ कर रहा था।
 
जिन्न हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा माने?
 
जिन्न क्या माने?
 
बेचारा अभी तुमने क्या कहा। हुकुम मुन्नका।
 
जिन्न हुकुम मुन्नका नहीं, हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा इसका मतलब क्या हुआ?
 
जिन्न हुकुम मेरे आका माने आप हुकुम करो मेरे मालिक।
 
बेचारा कौन है तुम्हारा मालिक?
 
जिन्न आप हैं मेरे आका।
 
बेचारा ए भैया, क्यों मेरा मजाक उड़ा रहे हो। मैं पहले ही बहुत परेशान हॅूं। मुझे और परेशान न करो। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो और आपना रास्ता नापो।
 
जिन्न ये मैं नहीं कर सकता।
 
बेचारा क्यों नहीं कर सकते। मुझे काका भी बुलाते हो….
 
जिन्न काका नहीं आका।
 
बेचारा जो भी हो मुझे आका काका बुलाते हो और परेशान भी करते हो।
 
जिन्न -स्वगत-वाह क्या आदमी मिला है! एक हजार साल में ही जमाना इतना बदल गया है। आदमी इतना भी बेवकूफ हो सकता है?
-प्रकट- देखो मेरे आका जब कोई उस चिराग को रगड़ता है तो मैं हाजिर हो जाता हँ?ू। चिराग रगड़ने वाले का दास बन जाता हँू और वह जो भी माँगता है मैं हाजिर कर देता हँू।
 
बेचारा क्या कहा… आप चिराग रगड़ने वाले के दास बन जाते हैं!
 
जिन्न जी सरकार यही प्रोटोकॉल है।
 
बेचारा अलादीन के चिराग की तरह।
 
जिन्न यह चिराग अभी आपके पास है सरकार औेर मैं आपका दास। हुकुम मेरे आका। आप जो भी माँगेंगे मैं हाजिर कर दूँगा।
 
बेचारा मैं जो भी माँगूँ तुम दे सकते हो!
 
जिन्न हाँ सरकार आपने चिराग रगड़ कर मुझे बुलाया और मैं चला आया। अब आप जो भी माँगोगे मैं हाजिर कर दूँगा।
हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा तुम यह बार हुकुम मेरे आका। मत बोलो। मुझे डर लगता है और भागने का दिल करता है।
 
जिन्न बोलना पड़ता है सरकार। यह हमारे कोड ऑफ कंडक्ट में लिखा हुआ है। डरिए मत सरकार माँगिए। हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा क्या माँगूँ। प्यास लगी है, घर से बाहर निकालने से पहले बीवी ने पानी भी नहीं पिलाया। भूत महाराज आप एक पानी का गिलास हाजिर कर दीजिए।
 
जिन्न अभी लीजिए सरकार। आंंइइइइइ…
 
बेचारा क्या हुआ।
 
जिन्न एक मिनट सरकार। सिगनल क्लीयर नहीं है। आपने पानी का गिलास माँगा ना?
 
बेचारा हाँ, पानी का गिलास।
 
जिन्न सरकार माफ कीजिए। यह मैं नहीं कर सकता।
 
बेचारा क्यों?
 
जिन्न मुझे नहीं मालूम यह पानी का गिलास क्या होता है। सोने का गिलास होता है, चाँदी का गिलास होता है पर पानी का गिलास क्या होता है, मुझे नहीं मालूम।
 
बेचारा पानी का गिलास माने एक गिलास में पानी।
 
जिन्न ओ आपको पानी चाहिए। ऐसा बोलिए न। यह लीजिए सरकार।
 
बेचारा अरे, यह आपने कैसे किया? वाह आप तो बहुत कमाल के भूत हैं ।
 
जिन्न हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा आप मुझे सेव ला कर दे सकते हैं।
 
जिन्न सेव?
 
बेचारा हाँ सेव।…. एपल।
 
जिन्न ओ एपल! यह लीजिए सरकार।
 
बेचारा अब थोड़ी चाय मिल जाय तो मजा आ जाय।
 
जिन्न चाय सरकार?
 
बेचारा हाँ चाय। नहीं समझे टी।
 
जिन्न टी… ओ पी क्यू आर एस टी.. यह लीजिए सरकार।
 
बेचारा अरे यह किसको ले आए?
 
जिन्न सरकार आप ही ने तो कहा कि टी चाहिए।
 
बेचारा लेकिन यह कैसी टी है?
 
जिन्न यह जयश्री टी है।
 
बेचारा हे भगवान!
 
जिन्न यह नहीं चाहिए तोे दूसरी टी ले आता हँ?ू सरकार मीना टी या टी कमला या बेला टी। वैसे यह बहुत अच्छी टी है सरकार। बहुत अच्छी रक्कासा है। बहुत अच्छा नाचती है। ए लड़की सरकार को नाच दिखाओ। नाचो।
बेचारा ओ भूत बाबा, छोड़ दो इस लड़की को।
 
जिन्न छोड़ दिया सरकार। ए लड़की जाओ।
 
बेचारा भूत महाराज?
 
जिन्न हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा मुझे अमीर बना दीजिए।
 
जिन्न अरब का अमीर सरकार?
 
बेचारा कहीें का भी बनाइए पर बनाइए अमीर।
 
जिन्न अभी लीजिए सरकार।
 
बेचारा यह क्या!
 
जिन्न लड़की सरकार।
 
बेचारा लड़की क्यों?
 
जिन्न सरकार अमीर आदमी का बहुत बेगम। रिच मैन, मैनी वाइभ्ज। जितना बड़ा अमीर उतना बड़ा हरम।
 
बेचारा ओ भूत मालिक, ओ जिन्न महाराज अमीर बनने के लिए रुपये चाहिए। लड़की नहीं। क्या तुम मुझे रुपये दे सकते हो?
 
जिन्न हुकुम मेरे आका।
 
बेचारा मुझे 100 रुपये दो।
 
जिन्न यह लीजिए।
 
बेचारा मुझे 10,000 रुपये दो।
 
जिन्न यह लीजिए।
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