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कविता
जिजीविषा

जिजीविषा

कलायन पत्रिका

जिजीविषा


यश मालवीय

घटाटोप मौसम में
चाय की चुस्कियाँ
अतीत के घूंटों में बदल
जाती हैं
हम चाय नही
अपना अतीत पीते हैं
लेकिन जीते हैं
और खूब जीते हैं

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