धर्म के संग न्याय की अन्याय की
सार्थकता के प्रबल पर्याय की
लक्ष्यभेदन की विजय की कर्म की
सत्य की नव वेदना की मर्म की
भावना की ज्ञान की सम्मान की
रक्तरंजित मौन की अपमान की
भारती के अश्रुपूरित आर्य की
यह कथा है एक द्रोणाचार्य की।
राजपुत्रों का ना शिक्षक मात्र था
महाभारत का वो अद्भुत पात्र था
पार्थ के गाण्डीव की टंकार था
वह समर के तार की झंकार था
पूछता है आज जग वह कौन था
वही जो अंधी सभा में मौन था
एकलव्यी प्रथा के आचार्य की
यह कथा है एक द्रेाणाचार्य की।
गगन में जब समय का नर्तन हुआ
इस धरा पर युग का परिवर्तन हुआ
परिरिथयॉ नई नया ही कोण है
आज के युग का नया ही द्रेाण है
नई परिभाषा नया पुरुषार्थ है
नया दुर्योधन नया ही पार्थ है
नव कुटी निर्माण निर्मम कार्य की
यह कथा है एक द्रोणाचार्य की।