समा यह सुहाना बयाँ हो तो कैसे
कलियाँ खिलीं है और गुंचे हँसे हैं
मुबारक़ सभी को यह दिन हो मुबारक़
कि बाबुल के दर पे समधी खड़े हैं
बचपन की यादें, वो झूला, वो गुड़िया
वो भाई से झगड़ा, और रूठ जाना
तुम्हें याद हो न, मुझे याद सब है
यादों का महफूज़ है वो ख़ज़ाना
रिश्ते पुराने हुए और गहरे
नए रिश्तों को ख़ूब गहरा बनाना
लम्बा सफ़र है, और सकरी डगर है
नए रास्ते मिल जुल के बनाना
अम्माँ की बातों का तुम मान रखिओ
आए जो गुस्सा, न गुस्सा दिखाना
बाबा की बातांे का तुम ध्यान रखिओ
नहीं कुछ भी मुश्किल, जो जी में ठाना
कितनी भी मसरूफ़ हो जाओ बिटिया
भईया की राखी को न भूल जाना
टुकड़ा जिगर का दिया हमने तुमको
हिस्सा जिगर का इसे तुम बनाना
लौटोगी जब तुम बच्चों की ननिहाल
बच्चा बनेगा बच्चों में नाना
विदा करना मुश्किल, विदा होना मुश्किल
(जुदा करना मुश्किल, जुदा होना मुश्किल)
ख़ुशी हर तरफ़ है, कि दो दिल मिले हैं
दुअ़ा करता हूँ तुम दोनांे के लिए मैं
पुख़ता रहें, यह जो बंधन ब्ंाध्ेा हैं