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कविता
नत्य नये-नये रूपों में

नत्य नये-नये रूपों में

कलायन पत्रिका

नत्य नये-नये रूपों में


विपिन पवार “निशान”

मेरे ह्मदय में आ
नित्य नये-नये रूपों में
मेरे अन्दर समा
असत्य मिटान, पाप हटाने
सत्य बन के, पुण्य बन के समा
बेसहारों के लिए सहारा बन के
बेसहारों के लिए सहारा बन के
प्यासों के लिए पानी बन के समा
हे निर्मल, हे दयालु, हे कृपालु
मेरे ह्मदय में आ
नित्य नये-नये रूपों में
मेरे अन्दर समा

दुश्मनी मिटाने, नफरत हटाने
दोस्त बन के, मोहब्बत बन के समा
अन्धकार को मिटाने प्रकाश बन के
बुराई को हटाने, अच्छाई बन के समा
हे निर्मल, हे दयालु, हे कृपालु
मेरे ह्मदय में आ
नित्य नये-नये रूपों में
मेरे अन्दर समा

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