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सुबह का अखबार तथा कृष्ण कुमार यादव की अन्य कविताएँ

सुबह का अखबार तथा कृष्ण कुमार यादव की अन्य कविताएँ

कलायन पत्रिका

सुबह का अखबार तथा कृष्ण कुमार यादव की अन्य कविताएँ


कृष्ण कुमार यादव

आज सुबह का अखबार देखा
वही मार-काट, हत्या और बलात्कार
रोज पढ़ता हूँ इन घटनाओं को
बस पात्रों के नाम बदल जाते हैं
क्या हो गया है इस समाज को
ये घटनाएँ उसे उद्वेलित नहीं करतीं
सिर्फ ख़बर बनकर रह जाती हैं
कोई नहीं सोचता कि यह घटना
उसके साथ भी हो सकती है
और लोग उसे अख़बारों में पढ़कर
चाय की चुसकियाँ ले रहे होंगे।

कृष्ण कुमार यादव की कविताएँ कलायन पत्रिका में

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