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उपन्यास

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कलायन पत्रिका

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चंद्रभवन तृप्तिभवन – मथुरा कलौनी

सरल हास से ओत-प्रोत, आपस में गुथीं और उलझी हुई दो प्रेम कथाएँ और एक षड़यंत्र।

सीटी प्रसंग (1. 2.)
देदीप्यमान दीपा (1. 2.)
तृप्तिभवन अभियान
विराट् समस्या
प्रोफेसर डोगरा की शिष्या
जनक जोर
कांता का चूख
मेलमिलाप
षड़यंत्र
ककड़ी कांड
मेजर पंत
ककड़ी में एक और तीर
जाड़ों की प्रतीक्षा
ऊपर
आगे

ऊपर     आगे

 

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चंद्रभवन तृप्तिभवन – मथुरा कलौनी

जब होश आया तो अपने को कगार पर खड़ा पाया, अपनों से दूर अपरिचितों के देश में। वापसी का रास्ता बहुत ही दुर्गम था। शरीर अस्वस्थ, अनजानी डगर, अनजाने लोग, और केवल पुरानी धुंधली याद का सहारा। क्या वह वापस आ पाया?
पढ़िए मथुरा कलौनी की बहुत ही मर्मस्पर्शी कहानी।

 

भाग 1
भाग 2
भाग 3
भाग 4
भाग 5
भाग 6

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चंद्रभवन तृप्तिभवन – मथुरा कलौनी

पंजाब के ग्रामीण जीवन का एक जीवंत चित्रण। लगता लेखिका के हाथ में लेखनी नहीं बल्कि जादुई डंडा हो। आप टोबा सागर गेट पहुँच जाते हैं जहाँ गाँव की गंध आपके नथुनों में समा जाती है। और पात्र पन्नों आजाद हो कर आपके सामने आ जाते हैं। आप बिताइए कुछ समय टोबा सागर गेट गाँव के रहने वालों के साथ विशेष कर रानो और उसके कुटुंब के साथ।
– संपादक

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