प्रेमचंद
जन्म – 31 जुलाई 1880 निधन – 8 अक्टूबर 1936
प्रेमचंद का लड़कपन संघर्ष में बीता। ट्यूशन कर करके उन्होंने मैट्रिक पास किया और स्कूल-मास्टरी करते हुए बी ए तक पढ़ाई की। पिता ने कम उम्र में ही उनकी एक बेमेल शादी कर दी । कटु अनुभवों के बाद जब पहली पत्नी सदा के लिए मायके चली गई तो प्रेमचंद ने एक बाल विधवा से दूसरी शादी की, जिसके साथ जीवन कुछ स्थिर हुआ। भयंकर गरीबी से जूझते हुए तेरह वर्ष की उम्र से ही प्रेमचन्द ने लिखना आरंभ कर दिया था, तथा वे मरते दम तक लिखते रहे।
उनका जीवन गरीबी और विषमताओं से भरा था, पर प्रकृति से वे हँसमुख थे। अपनी रचनाओं के द्वारा उन्होंने भारतीय समाज की समस्याओं को उभारा है तथा समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है।
उनके प्रमुख उपन्यास हैं सेवासदन, कर्मभूमि, गबन, रंगभूमि, निर्मला और गोदान। उनकी प्रमुख कहानियाँ हैं कफन, पंच परमेश्वर, ईदगाह, पूस की रात, बड़े भाईसाब, शतरंज के खिलाड़ी आदि।
उनकी रचनाओं पर कई फिल्में बनी है जिनमें सत्यजित राय के निर्देशन में बनी शतरंज के खिलाड़ी और सद्गति प्रमुख हैं।





