खान पान की आदतें -अपनी सहायता स्वयं करें
वी के अग्रवाल
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वी के अग्रवाल

पूर्ण स्वस्थ लोग भी ध्यान दें, की हमारी खान पान की कुछ आदतें गलत हो सकती हैं, और उन्हें बदलने की आवश्यकता है |
शरीर में पाचन क्रिया दो प्रकार से होती है | पहली पेट में, जो की प्रोटीन्स (पनीर, दालें, अंडा, मछली आदि) के लिए एवं दूसरी क्षारीय जो की कार्बो हाईड्रेट्स (शर्करा एवं स्टार्च आदि) के लिए छोटी आंत में |
आजकल बहुत से व्यक्तियों के साथ ऐसा होता है क़ि बड़ी मात्रा में भोज्य पदार्थों का सेवन करने के बाद भी उन्हें उसका कोई भी लाभ प्राप्त नहीं हो पाता है, क्योंकि उसी समय वे बहुत से ऐसे पदार्थ खाते हैं जोकि विटामिन एवं खनिज धारी तत्वों के पाचन में हस्तक्षेप करते हैं| युवावस्था में हमारे भोजन द्वारा उचित लाभ नहीं मिलपाने की कमी महसूस नहीं होती है |
पनीर जोकि कैल्सियम में समृद्ध होता है, हमारे खाने के उपरांत जब छोटी आंत में पहुंचता है, उस समय यदि क्षारीय प्रक्रिया चल रही हो तो हमारे शरीर को नगण्य कैल्सियम उपलब्ध होगा . क्योंकि क्षार के साथ मिलने से कैल्सियम एक ऐसा रासायनिक मिश्रण बनाता है जोकि शरीर के लिए अप्रयुक्त रहता है | अतः शारीर के बहार निकल जाता है| चाहे कितनी भी मात्र में पनीर खाया जाये, हम कैल्सियम की कमी से ग्रसित रहते हैं, क्योंकि कैल्सियम शरीर में समाहित नहीं हो पाया | लेकिन जब कैल्सियम युक्त खाद्य पदार्थ छोटी आंत में पहुंचे तब उसमें अम्लीय प्रक्रिया चल रही हो तो काफी कैल्सियम शरीर में प्रयुक्त हो जाता है |
आहार विशेषज्ञों की सलाह है की उच्च मात्रा वाले कार्बो हाईड्रेट्स ( आलू, चावल, पास्ता, ब्रेअड, मिठाई आदि) को कभी भी उच्च मात्रा वाले वसा (मक्खन, क्रीम) एवं प्रोटीन्स के साथ नहीं खाना चाहिए | अगर नाश्ते में अंडा ले रहे हैं तो ब्रेअड या अनाज युक्त भोजन नहीं लिया जाये | हाँ, प्रोटीन्स (पनीर, अंडा, मछली आदि) को वसा पदार्थों के साथ खाएं | वास्तव में मुख्य वसा पदार्थों को प्रोटीन खाद्य पदार्थों के साथ ही लेना चाहिए|
जब हम कार्बो हाईड्रेट्स स्टार्च एवं शर्करा खाते हैं, तब हमारी छोटी आन्त में क्षारीय अवस्था बन जाती है एवं ऐसी दशा होती है जबकि अन्य भोज्य पदार्थों के आवश्यक घटक प्रयोग में नहीं आ पाते हैं | कार्बो हाईड्रेट्स पेट में कतिपय प्रोटीन के पाचन में बाधा पहुंचाते हैं, जिसकी वजह से आंशिक रूप से पाचन किया हुआ भोजन विषेले पदार्थ में बदल जाता है |
अनुसन्धान से मालूम हुआ है की, अपूर्ण पाचन से प्रोटीन्स, मेक्रो अणुओं में परिवर्तित होकर शरीर में संचरण करते हैं. इस प्रकार विषेले पदार्थ हमारी प्रतिरोधक प्रणाली की क्रियाशीलता में बाधा उत्पन्न करते हैं और रोग के लक्षणों के रूप में परिलक्षित होते हैं | प्रोटीन और कार्बो हाईड्रेट्स एक साथ खाने से हमारा भोजन अमीनो असिड्स में बदलने की बजाय वास्तव में अलेर्जी पैदा करने वाले जेहरीले अमिंस में बदल जाता है |
कार्बो हाईड्रेट्स का पाचन ज्यादातर छोटी आंत में होता है, पेट में नहीं | पाचन क्रिया अग्नाशय (पेंच्रियास) के स्त्राव की सहायता से सम्पन्न होती हैं | इस समस्त प्रक्रिया का प्रमुख कारक अमिलेज hsहै, जोकि स्टार्च को क्षारीय माध्यम में अपघटित करता है. पेट के रास्ते छोटी आँतों में जाते समय कार्बो हाईड्रेट थोड़े से हाइड्रो क्लोरिक एसिड से मिल जाता है |
अधिकांश वसा पेट में बिना कोई बदलाव के छोटी आंत में प्रवेश कर जाते हैं, तथा पित्ताशय को पित्त खली करने के लिए प्रेरित करते हैं | पित्त, वसा का पायसिकरण करता है | इससे वासिय अम्ल तैयार होता है जोकि छोटी आंत में प्रक्रिया करता है | इस प्रकार जब छोटी आंत में वासिय अम्ल पैदा हो रहे हों और उसी समय कार्बो हाईड्रेट्स पच रहे हों तो क्षारीय स्त्रावों से वासिय अम्लों के मिलने से अमिलेज की क्रिया दब जाती है तथा अपचित कार्बो हाईड्रेट्स गैस करक होते हैं | बहुत से स्वस्थ लोग, नारंगी के रस का सेवन, स्तार्च्युकता भोज्य पदार्थों के साथ बिना किसी परेशानी के सेवन कर लेते हैं, परन्तु शरीर में इससे नुक्सान होता रहता है |
हर बार जब एक स्वस्थ व्यक्ति अम्ल कारक पदार्थों एवं स्टार्च युक्त पदार्थों का सेवन करता है वह अपनी पाचन क्रिया को नुक्सान एवं स्वयं को तकलीफ दे रहा होता है | इस प्रकार ग्रहण किये हुए आहार से बहुत कम लाभ प्राप्त होता है | यद्यपि हमारे शरीर के अवयवों की समायोजन करने की क्षमता असीमित है, परन्तु १०-१५ वर्षों के बाद, उपरोक्त प्रक्रिया के कारण, कुछ व्यक्तियों की क्षमता असाधारण रूप से कम हो जाती है और वे बहुत सी बिमारियों के शिकार हो जाते हैं |
युवा व्यक्तियों में पर्याप्त रूप से जुइसेस पैदा करने की क्षमता होती है परन्तु गलत आहार मिश्रण से उनके शारीरिक अवयवों पर अतिरिक्त भार पड़ता है | अगर हम गलत खानपान मिश्रण से शारीरिक क्षमता का दुरूपयोग करते हैं तो मध्यावस्था तक पहुह्चाते पहुंचाते हमारी पाचन शक्ति को ख़राब होने से कोई नहीं बचा सकता है| इससे शारीर में चिंताजनक लक्षण तो पैदा होंगे ही बल्कि पाचन क्रिया भी रासायनिक रूप से क्षतिग्रस्त होगी | इस अभिक्रिया से भोजन तत्वों की कमी से हमारे अंगों के उतक भी ख़राब अवस्था में पहुँच जाते हैं | गंभीर बिमारियों की सम्भावना अधिक हो जाती है| हमारी जिंदगी में अधिक व्यवधान आते हैं और ढ्रद बिश्वासी, विशेष स्वस्थ रहकर जीने की योग्यता ख़तम हो जाती है | जबकि बराबर खाध्य पदार्थों के मिश्रण के प्रयोग से गंभीर से गंभीर बीमारियाँ भी दूर रहती हैं |
इस विषय में हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है:
| सामान्य पौष्टिक तत्त्व तालिका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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