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आखिर कब तक

आखिर कब तक

कलायन पत्रिका

आखिर कब तक?


मथुरा कलौनी

यह नाटक आज की शासन व्यवस्था पर एक करारा व्यंग्य है। इसमें हास्यरस का यथेष्ट समावेश है। पढ़िए एक विचारोत्तेजक और सशक्त रचना।

नेता जी का अपने चार समर्थकों के साथ प्रवेश। दूसरी दिशा से धावक का प्रवेश। मंच पर धीरे धीरे पूर्ण प्रकाश।

नेता अजी सुनिए।
धावक क्या है?
नेता आप ये क्या कर रहे हैं?
धावक दिख नहीं रहा है….दौड़ रहा हूँ।
नेता दौड़ तो रहें हैं, लेकिन क्यों?
धावक देश के लिए।
नेता देश के लिए?
धावक हाँ, सब मिलकर दौड़ेंगे तो देश भी दौड़ने लगेगा।
नेता अरे भाई, पैंतालीस बरस के बाद देश के लिए दौड़ने की क्या सूझी?
धावक देश को आगे बढ़ाने के लिए।
नेता ह ह ह…..वैसे आप दौड़ ही रहे हैं न? कहीं भाग तो नहीं रहे?
धावक नहीं,….दौड़ ही रहे हैं…..परंपरानुसार हम भी दौड़ने के बाद वापस वहीं पहुँच जाएँगे जहाँ से चले थे। इससे सिद्ध होता है कि हम भाग नहीं रहे हैं।
नेता अच्छा….अच्छा…पर आप तो बताइए कि आप कहाँ तक दौड़कर देश को कहाँ तक ले जाएँगे?
धावक अगले चौराहे तक। जहाँ पर महात्मा गांधी का पुतला लगता है।
नेता वहीं तक क्यों?
धावक क्योंकि देश के नाम पर जो कुछ किया जाता है, वह महात्मा गांधी के नाम पर खत्म किया जाता है। पर….आप भी देश के लिए कुछ कर रहे हैं?
नेता हाँ…हम भी गांधी जी की याद को ताजा करने के लिए इकसठ साल पुराना डांडी का इतिहास दोहरा रहे हैं।
धावक ओ…हो, समझ गया, आप शायद डांडी यात्रा पर जा रहे हैं।
नेता हाँ।
धावक अच्छा, आप डांडी कब तक पहुँचेंगे?
नेता हम डांडी नहीं जाएँगे। डांडी बहुत दूर है और फिर उƒा भी काफी हो गई है।
धावक तो?
नेता एम.जी.रोड।
धावक यानी महात्मा गांधी रोड तक जाएँगे। वहीं तक क्यों?
नेता वहाँ पर एक पंसारी की दुकान है। वह सच्चा गांधीवादी है, उससे एक किलो नमक लेंगे।
धावक क्यों?
नेता अरे मूर्ख! स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में कुछ मालूम नहीं है तुम्हें? गांधी जी डां़डी क्यों गए थे? नमक लाने। नमक में बड़ी ताकत होती है। डां़डी में गांधी जी ने एक मुट्टी नमक उठा लिया तो अंग्रेजी साƒााज्य हिल गया था।
धावक आप एक किलो नमक उठा लेंगे तो किसका साƒााज्य हिलेगा?
नेता (तैश में) अरे दुनिया हिल जाएगी दुनिया!….भाग यहाँ से।
   
धावक का प्रस्थान। नेता जी के साथ उनके समर्थकों का भी दूसरी दिशा में लोप।
चार पाँच लोगों का प्रवेश। किसी भारी गाड़ी को धक्का देने की मुद्रा में खड़े चीख रहे हैं। माथे का पसीना पोंछते हुए एक दूसरे को प्रेरित कर रहे हैं – ”जोर लगा के ऐसा…”।
नेता जी का समर्थकों के साथ पुन: प्रवेश।
   
नेता (आश्चर्य सेे) ये क्या कर रहे हो मूर्खों?
आदमी1 नेता जी नमस्कार।
नेता ये क्या कर रहे हो तुम लोग?
आदमी2 धक्का दे रहे हैं नेता जी।
नेता किसे दे रहे हो मूर्खो?
आदमी2 देश को।
नेता अबे मूर्खों, देश को धक्का क्यों दे रहे हो?
आदमी2 आगे बढ़ाने के लिए।
आदमी1 नेता जी, आप ही तो बोले थे कि देश को कड़ी मेहनत से आगे बढ़ाना है।
नेता अरे तो देश को यहाँ क्यों धक्का दे रहे हो!
आदमी2 तो देश है कहाँ नेता जी?
नेता (हँस कर) अरे पूछ लेते मूर्ख। तुम्हारी मूर्खता पर मुझे हँसी आ रही है। इतनी मेहनत बेकार की…अच्छा छोड़ो….हट जाओ। मेरी बात को ठीक से समझे नहीं। मैंने कहा था, मेहनत से ही देश आगे बढ़ सकता है, कड़ी मेहनत….कड़ी मेहनत!
आदमी1 तो कड़ी मेहनत करें कहाँ नेता जी। हमें तो काम ही नहीं मिलता।
नेता पढ़े लिखे हो?
आदमी1 हाँ नेता जी, ग्रेजुएट हैं लेकिन काम नहीं मिलता। अब आप ही बताइए कड़ी मेहनत कहाँ करें?
नेता (कुछ सोचकर) तुम नौकरी खोजने में कड़ी मेहनत करो।
आदमी1 बहुत खोजा। कोई नौकरी नहीं मिलती।
नेता (सोचकर) …. अच्छा …. अभी तुम उधर बैठ जाओ। मैं तुमसे बाद में बात करूँगा। (दूसरे आदमी की तरफ इशारा करते हुए) तुम क्या करते हो?
आदमी2 आपकी फैक्टरी में काम करता हँू।
नेता (तीसरे आदमी से) तुम क्या करते हो?
आदमी3 आपके फार्म की देखभाल करता हँू सरकार।
नेता (चौथे आदमी से) तुम क्या करते हो?
आदमी4 आपके सिनेमा हाल में गेटकीपर हँू, सरकार।
नेता ठीक है। तुम लोग कड़ी मेहनत करो …. देश आगे बढ़ेगा। याद रखो कड़ी मेहनत …. कड़ी मेहनत!
   
  2,3,4 की वापसी
   
आदमी1 और मैं सरकार।
नेता अच्छा तो तुम बेकार हो।
आदमी1 हाँ माई बाप।
नेता तुम बेकारी का मुकाबला कड़ी मेहनत से करो।
आदमी1 उससे देश कैसे बढ़ेगा?
नेता देखो भाई, देश में कई करोड़ बेकार हैं, बेकारी का मेहनत से मुकाबला करो …. करोड़ों बेकार मेहनत करेंगे तो देश आगे बढ़ जाएगा।
आदमी1 पर वो मेहनत करें कहाँ?
नेता मेहनत से मेहनत करने की जगह खोजें। परिश्रम से क्या नहीं होता। अब मेरा ही केस लो। 20 साल पहले सिनेमा के टिकट ब्लैक करता था। वह काम इतनी मेहनत से किया कि आज चार सिनेमा हॉलों कि मालिक हँू। एक फैक्टरी चलती है। स्विटजरलैंड में खाता है। लेकिन कड़ी मेहनत करना नहीं छोड़ा। …. तुम लोग भी ….
   
  वापस गए हुए 4 लोगों का पुन: प्रवेश
   
आदमी2 मालिक बहुत कड़ी मेहनत की।
आदमी3 खून पसीना एक कर दिया सरकार।
आदमी4 माई बाप, बड़े चौकस रहे। कड़ी मेहनत की।
नेता ठीक है, ठीक है। जीवन में इसी तरह कड़ी मेहनत से काम करते रहो।
आदमी2 सरकार, कहें तो एक बात पूछूँ।
नेता पूछो पूछो। अरे भाई पूछोगे नहीं तो ज्ञान कैसे बढ़ेगा।
आदमी2 देश आगे कितना बढ़ गया सरकार?
नेता थोड़ा सा आगे बढ़ा है।
आदमी2 किस ओर आगे बढ़ा है माई बाप? रोजगार से गुजारा नहीं होता। दाम बढ़ते जा रहे हैं।
नेता अरे मूर्ख, दाम बढ़ने से ही तो देश आगे बढ़ेगा। यह अर्थशास्त्र का मामला है। तू ठहरा अनपढ़, अर्थशास्त्र क्या समझेगा। यूँ समझ कि देश को आगे बढ़ाने के लिए दाम बढ़ने जरूरी हैं। देश देश होता है। महान होता है। मेरा भारत महान।तो भाई, देश चलाने वालों को बड़े पैमाने पर सोचना पड़ता है। देश कैसे आगे बढ़ेगा? दाम बढ़ेगा देश बढ़ेगा। देश बढ़ेगा तो कर्ज मिलेगा। कर्ज मिलेगा तो राष्ट्र की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

तुम लोग विपक्षी नेता ओं बहकावे में मत आओ। वे जनता को गुमराह कर रहे हैं कि दाम बढ़ने से आम जनता की परेशानी बढ़ेगी। उन्हें कौन समझाए कि आम जनता का जो भी हो, राष्ट्र का तो भला होगा। अलगाववादी प्रवृत्तियाँ समाप्त होंगी। विघटनकारी ताकतोें का नाश होगा। भारत अखं़ड होगा।

तुम लोगों की समझ में आ गया न।

चारों (निराश भाव से स्वीकृति में सिर हिलाते हैं।)
नेता अच्छा तो अब जाओ और कड़ी मेहनत से देश को आगे बढ़ाने में जुट जाओ। पर याद रखना, सब दाम – वाम बढ़ने की तुच्छ बातें अपने मन से निकाल देना।
चारों ‘ठीक है सर’ कहकर शीश झुकाए निकल जाते हैं।
नेता (पहले से) तो भाई तुम्हारा क्या इरादा है?
आदमी1 हमें कोई नौकरी दिला दें सरकार। नौकरी में कड़ी मेहनत करके देश को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं।
नेता अच्छा ठीक है। अगले हफ्ते कुछ इंटरव्यू होने हैं। तुम कुछ योग्यता दिखा सके तो नौकरी मिल जाएगी। अभी जाओ। (दोनों जाते हैं)
   
(दृश्य परिवर्तन)
घोषणा
फलाँ दिन, फलाने समय निम्नलिखित पोस्टों के साक्षात्कार हेतु सत्ता भवन की फलानी मंजिल पर, कमरा नंबर फलाँ में उपस्थित हांे…….।
   
रामेश्वर (प्रवेश करके) इंटरव्यू! मजा आ गया। अपने नेता जी भी फैक्टरी में रहेंगे।
   
  प्रतिकोरस रामेश्वर को समझाता है।
   
पहला जल्दी जल्दी रट लो। भेजे को रस्सी में बट लो।
दूसरा पढ़ा पढ़ाया फिर दोहरा लो। डिग्री फोटोस्टैट करा लो।
तीसरा बाल काट लो, नाखून काट लो। मंदिर में खुद लड्डू बाँट दो।
चौथा उल्टी-सीधी बात न करना। नाजुक मसलों पर चुप रहना।
चारों आगे ऊपर वाले की मर्जी। बोल सियाबर रामचंद्र की जै।
   
प्रतिकोरस बैठता है।
नेता जी सहित इंटरव्यू कमिटी के पाँच सदस्य प्रवेश करके जमघट के रूप में खड़े होते हैं।
नेता जी तनकर खड़े हैं। चारों अलग खड़े होते हैं।
   
चारों भीड़ खड़ी है उम्मीदवारों की
अपनी – अपनी माँ के राजदुलारों की
यही कोई चार हजार लड़के आए हैं
जनरल नालेज रास्ते में भी रटते आयें हैं।
नेता ठीक है …. ठीक है, एक-एक करके उन्हें ऊपर बुलाओ।
चारों उल्टे-सीधे प्रश्न पूछकर जल्दी से टरकाओ।
   
  पहला कान हाथ रखकर कव्वाली का आलाप लेता है और ‘पड़पोते का साला’ तक अपनी बातों को कव्वाली के रूप में गाता है।
   
पहला हाँ निश्चित है कि आज बनेगा।
बाकी भाई क्या?
पहला हाँ… आí… आज बनेगा।
बाकी क्या?
पहला यहाँ अफसर आला।
चारों कौन?
पहला चेयरमैन के बहनोई के पड़पोते का साला।
   
  पाँचों नाचते हुए मंच के अलग – अलग कोनों में जाते हैं।
   
पहला मिस्टर रामेश्वर दयाल!
   
  रामेश्वर भीतर प्रवेश करता है। पाँचों एक कदम आगे लेकर छोटा दायरा बनाते हुए रामेश्वर की परिक्रमा करते हैं।
   
पाँचों हा-हा-हा-हा ….. कहाँ तक पढ़े हो?
रामेश्वर बी.ए..
पाँचों हा-हा-हा-हा कौन डिविजन?
रामेश्वर फस्र्ट।
पाँचों फस्र्ट? हा-हा-हा-हा वैल वैल वेरी वैल।
रामेश्वर हें-हें-हें-हें….।
   
  पाँचों चौंक कर रुक जाते हैं।
   
पहला क्यों हँसते हो पाजी लड़के!
दूसरा दाँत फाड़कर ऐसे!
तीसरा कितने बेहूदा हो तुम!
चौथा और जाहिल हो तुम कैसे!
पाँचों चले आते हैं कहाँ कहाँ से!
  अपनी अपनी जगहों पर लौटते हैं।
   
पहला हूँ …. तो तुमने हिन्दी साहित्य भी पढ़ा है? तो यह बताओ कि गुलशन नंदा जी का प्रथम उपन्यास कौन सा था और किस बरस में प्रकाशित हुआ था?
रामेश्वर लेकिन गुलशन नंदा जी का तो हिन्दी साहित्य में कोई योगदान नहीं है।
पाँचों क्या….? कोई योगदान नहीं है?
दूसरा क्या….? कोई योगदान नहीं है?हिन्दी का ऐसा कौन सा उपन्यासकार है जिसके हर नावल पर फिल्म बनी हो।
तीसरा और जिसकी हर फिल्म कम से कम सिल्वर जुबली हिट रही हो।
चौथा और जिसके गीत महाकवि आनंद बक्षी जी ने लिखे हों और संगीत से सँíवारा हो पं. राहुलदेव जी बर्मन महाराज ने।
नेता और देश की ऐसी कौन सी लाइब्रोरी है जिसमें श्री गुलशन नंदा जी की रचनाएँ न उपलब्ध हों! यू नो, मेरी मिसेज के लिए तो गुलशन नंदा का नावल मुझसे भी ज्यादा जरूरी है।
पाँचों और तुम कहते हो कोई योगदान नहीं है……
रामेश्वर लेकिन सर, मुझे तो पढ़ाया गया है कि प्रेमचंद, यशपाल, भगवती चरण वर्मा….
पहला बस, बस, क्या चरण वर्मा, चरण वर्मा लगा रखी है। जब तुम्हें हिन्दी साहित्य के बारे में कुछ मालूम ही नहीं है तो क्यों टांग अड़ा रहे हो? और क्या विषय था तुम्हारा?
रामेश्वर जी, पॉलिटिकल साइन्स।
दूसरा पॉलिटिकल साइन्स यानी राजनीति शास्त्र। बहुत अच्छे, बहुत अच्छे। अच्छा तो यह बताओ प्रजातंत्र किसे कहते हैं?
रामेश्वर (खुश होकर) जी अब्राहाम लिंकन ने कहा है & Democracy is the Government…..
दूसरा (पूरा करते हुए) For the people of the people by the people. अरे मैं यह सड़ियल परिभाषा नहीं, असली प्रजातंत्र की बात पूछ रहा हूँ। (समझाते हुए) प्रजातंत्र उस सरकार को कहते हैं जो गधांे की होती है और गधों के भले के लिए गधों के द्वारा चलाई जाती है।
तीसरा हाँ, यह बताओ कि चुनाव किसे कहते हैं और उसकी प्रक्रिया क्या है?
रामेश्वर (सहम कर) जी, जनता अपने प्रतिनिधि……
तीसरा फिर वही किताबी बातें! जनता नहीं गधे बोलो! गधों कि सेवा के इच्छुक गधों कि तादाद इतनी ज्यादा होती है कि सरकार बनाने के लिए काबिल गधे तलाशे जाते हैं। इसी तलाश का नाम है चुनाव, जिस में लाखों करोड़ों रुपयों का खर्चा आता है, और शराब, गुंडागर्दी तथा काले धन का भी बदस्तूर प्रयोग किया जाता है।
चौथा हाँ, तो अब यह भी बता दो कि नेता किसे कहते हैं?
रामेश्वर जी, जनता के प्रतिनिधि को।
नेता अरे कौन जनता, कैसे प्रतिनिधि। चुनाव जीतने के बाद गधा लोग ही नेता कहलाते हैं। की तरफ नजर डालकर) अच्छा तो अब Quick Quiz Contest कर लिया जाय।
पहला हिन्दी दिवस 14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
रामेश्वर जी इसी दिन हिन्दी को राजकाज की भाषा बनाने का निर्णय लिया गया था।
सभी नो, शहीद दिवस की तरह हिन्दी दिवस भी उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन अंग्रेजी के हाथों हिन्दी शहीद हुई थी।
दूसरा बार्सिलोना ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने किस पिछले रिकार्ड की बराबरी की और कौन सा रिकार्ड तोड़ डाला?
रामेश्वर रिकार्ड? जी भारतीय खिलाड़ियों ने किसी भी खेल में….
दूसरा नोट कर लो। अगले किसी इंटरव्यू में काम आएगा। हमारे खिलाड़ियों ने ओलंपिक खेलों में पिछले चालीस सालों में कोई पदक न जीत पाने के अपने ही रिकार्ड की बराबरी की और हाकी में पराजय के पिछले सारे रिकार्ड चकनाचूर कर के रख दिए।
तीसरा ”शेयर बाजार का मसीहा” कहे जाने वाले उस वित्त विशेषज्ञ का नाम बताओ जिसने अपने नाम के अर्थ को सार्थक कर दिया।
रामेश्वर जी वित्तमंत्री मनमोहन सिंह। उनकी मनमोहक नीतियों से शेयर बाजार की हालत सुधरी।
तीसरा नॉन्सेन्स! वह शख्स है हर्षद मेहता। उसी के जादुई करिश्मे से शेयर आसमान में उड़ने लगे। सट्टेबाजों की चाँदी कटने लगी तो वे हर्षित हो उठे। हर्षद का मतलब ही है – हर्ष देने वाला। यथा नाम तथा गुण।
चौथा अब में कभी चाँटा नहीं मारूँगा। यह किसने कब और क्यों कहा?
रामेश्वर (आक्रोश पूर्वक) अब मैं समझ गया हूँ कि आप लोग इस तरह के ऊलजलूल सवाल पूछकर मुझे अयोग्य सिद्ध करना चाहते हैं।
चौथा शटअप। राष्ट्रीय जीवन से जुड़े हुए इतने महत्वपूर्ण प्रश्नों को ऊलजलूल कहते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती? ”स्टारडस्ट” के पत्रकार को फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने एक थप्पड़ मार दिया तो सारा प्रेस और फिल्म जगत् आमने – सामने आ गए और अंत में अनुपम खेर को कहना ही पड़ा कि ”अब मैं कभी चाँटा नहीं मारूँगा।”
रामेश्वर लेकिन इस थप्पड़ का मेरी नौकरी से क्या ताल्लुक है?
दूसरा अरे ताल्लुक क्यों नहीं है? तुम्हें हमने नौकरी पर रख लिया और तुम भी ऐसे ही थप्पड़ चलानेे लगे तो क्या होगा?
दूसरा बिना सोचे – समझे थप्पड़ मारने का अंजाम ही तुम्हें मालूम नहीं तो नौकरी क्या पाओगे! भई नौकरी में तो कभी – कभी आदमी को अफसर के थप्पड़ – धूँसे खाने लिए भी तैयार रहना पड़ता है।
रामेश्वर देखिए आप मुझे इस तरह अपमानित नहीं कर सकते। मेरी पास यूनिवर्सिटी की फस्र्ट डिवीजन की डिग्री है और सैकड़ों भाषण, वाद – विवाद और जनरल नॉलेज की प्रतियोगिताओं में मैंने इनाम जीते हैं।
नेता मिस्टर रामेश्वर दयाल, स्कूली मुकाबलों में इनाम जीतना और बात है और असली जिंदगी में सफल होना बिल्कुल अलग बात है।
रामेश्वर तो मेरी इन डिग्रियों, प्रमाणपत्रों और योग्यता की कोई कीमत नहीं।
नेता हाँ, यही समझ लो।
रामेश्वर पर मैं ऐसा नहीं मानता। मैं तुम लोगों का फैसला हरगिज स्वीकार नहीं करूँगा।
पाँचों (चुनौती के लहजे में) अरे हमारा क्या बिगाड़ लोगे तुम?
रामेश्वर (उत्तेजित होकर) इस सवाल का जवाब अब मैं नहीं, मेरे जैसे लाखों करोड़ों नौजवान, (जनता की ओर इशारा करके) यह सारी जनता और सारा देश देगा।
नेता अरे भई जरा सुनो, इस तरह जोश खाने से कुछ नहीं मिलेगा।
रामेश्वर अब मुझे कुछ नहीं सुनना। तुम्हारे सवाल सुनते-सुनते मैं तंग आ गया हूँ। सवाल मेरे पास भी हैं और मैं उन्हें पूछ कर ही यहाँ से हटूँगा। पर तुमसे नहीं उनसे (दर्शकों की तरफ इशारा)।
रामेश्वर (ऊँची आवाज में भीड़ से) मेरे देश के लोगों, इस सड़ी हुई व्यवस्था के कौरवी चक्रव्यूह में इन जयद्रथों के हाथों मेरे निर्मम वध का दृश्य देख कर तुम्हारा खून नहीं खौलता?
प्रतिकोरस हाँ अभिमन्यु, हमारा खून खौलता है। इस चक्रव्यूह से हम तुम्हें बाहर निकालेंगे।
रामेश्वर हे मेरे गौरवशाली राष्ट्र के निवासियों, मेरे जैसे लाखों – करोड़ों एकलव्यों के अँगूठे तुम्हारी आँखों के सामने आखिर कब तक काटें जाते रहेंगे?
प्रतिकोरस हम एकलव्यों के अँगूठे, अब और नहीं कटने देंगे।
रामेश्वर जाति, वर्ग, संप्रदाय और कुलीनता का ब्राहृास्त्र कर्णों की प्रतिभा और तेज को आखिर कब तक निगलता रहेगा, जवाब दो।
प्रतिकोरस हम कर्ण की प्रतिभा और तेज को क्षितिज पर ला कर रहेंगे।
रामेश्वर अगर तुम्हारा यही संकल्प है तो आओ मेरे साथ। अब हम चालबाजों और मक्कारांे की उस दौड़ में हर्गिज शामिल नहीं होंगे जो गांधी जी के पुतले तक या एम.जी रोड पर खत्म हो जाती है।
हम आज, इसी क्षण उस दौड़ की शुरुआत करेंगे जो अन्याय और शोषण से मुक्त समाज की रचना के लिए, योग्यता को उसका हक दिलाने के लिए और धोखेबाजों का मुखौटा उतारने के लिए होगी।
मुझे यकीन है, इस दौड़ में आप मेरे साथ जरूर शामिल होंगे।
मुझे यकीन है, इस दौड़ में आप मेरे साथ जरूर शामिल होंगे।
   
  रामेश्वर दौड़ना शुरू करता है। रामेश्वर और प्रतिकोरस के सदस्य, नेता और उसके सहायकों के चारांे ओर दौड़ने लगते हैं। नेपथ्य संगीत। धीरे – धीरे संगीत और प्रकाश मंद पड़ता जाता हैं।
   
 
-समाप्त-
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