कुर्सी ….
तुमको मेरा प्रणाम
कर तेरे चारों पायोंं की परिक्रमा
करूँ तुझे सलाम।
मैं क्या
मंत्री संतरी सांसद विधायक
ऐरे गैरे… नत्थु खैरे
सभी हैं तेरे गुलाम।
तू …….
अगर पकड़ में आ जाए
तुझे ऐसा चूमूँं
देखकर पत्नी …..
मारे जलन के मरे
मैं क्यों डरूँ
अर….. रे…
तू मिल जाए
एक नहीं हजार कर लूँ।
अगर पकड़ में आ जाए
सुध बुध ना रहे मुझे
बस तुझ से ही चिपका रहूंॅ
अर तू रहे मुझे ऐसे ही चिपकाए
देख देख कर हम दोनों को
चिपको आंदोलन भी शर्माए।
कुर्स्स्स्सी…………….
तू मोहिनी है
तू ही मेरी सोफियांलारा
तू ही मेरी कैलोपैटरा भी
इनके थे देा दो पाँव
तेरे तो चारा हैं
उनमें था थोड़ा थोड़ा नशा
तुझमें तो डबल नशा है।
+ अगर पकड़ में आ जाए
तू … शिव है
तू …सुंदर है
तू …लक्ष्मी है
तू …ये है
तू …वो है
तू …सब कुछ है
अगर पकड़ में आ जाए
एक बार …. बस एक बार
तू मुझे …
अगर ऊपर बिठा के देख
अगर ……मैं
नर से नारायण न हो जाऊँ तो कहना।