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कविता
तुम्हारा साथ

तुम्हारा साथ

कलायन पत्रिका

तुम्हारा साथ


भूमिका भाटिया

तुम्हारा साथ जो छूटेगा
तब हम नहीं होगें
तुम्हारा हाथ जो छूटेगा
तब हम नहीं होगें
जीना तो पडेगा
जी तो जायेगें
शिकवा भी तुमसे कुछकर न पायेगें
शिकायतों की गुजाइश न होगी
पर क्या दिल से दिल की बात होगी
जज्बात में मेरे सिर्फ
ख्यालात होंगे,
तुमसा न कोई दूसरा होगा
न ऐसी मुलाकात होगी
इन प्यारी बातों की न आवाज होगी,
रुह कांप उठती है
अब साथ छूटने की बात पर
हमें मालुम है
दिल तो होगा पर
उसमें धड़कनों की आवाज न होगी।

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