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आँसू

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कलायन पत्रिका

आँसू


के के राजपूत

भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू
अनुभूति के आलिंगन में प्रतिबिंबित हुए आँसू
मैं शाश्वत, तुम शाश्वत, सब शाश्वत
अवनि से अंबर तक सभी शाश्वत
रिश्तों की बुनियाद निरंतर शाश्वत
जन्म और मृत्यु के समय भर आते आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

मैं और तुम को चलो आज हम बना दे
मनमुटाव की सीमा को आज गिरा दे
प्रेम के गंगा-जमन चलो फिर बहा दे
ऐसा ना हो कल रोये हम सबके आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

प्यार की परिभाषा मानव क्यों सोचते हंै
फल और वृक्ष वही जैसे बीज बोते हंै
अहंकार का मरुस्थल पुष्प कहाँ होते हंै
अभिमान की धरती पर उगते रोते आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

अनुभूति की कलियों का तिरस्कार करो ना
करुणा की नगरी भूले से नीलाम करो ना
शिशु की पवित्र हँसी का अपमान करो ना
नियति रोयेगी गर ठुकराओगे निर्धन आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

अनुभूति ही मानव की आधार शिला है
यही नींव यही आधार और यही किला है
महकता मुस्कुराता जीवन वरदान मिला है
सुरभित गर्वित और अलौकिक बन जाएँ आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

भावनाओं की भावभीनी रंगरेलियाँ बनी रहें
आशीष की पुष्पांजलि सुगंध बिखेरती रहे
स्मृति पटल पर आशाओं का गुलदस्ता सजा रहे
प्रकृति के अनमोल रत्नों में कभी ना निकले आँसू
भावनाओं की प्रतिध्वनि से गुंजित हुए आँसू

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