खुदा! तू ही बता
जहाँ में कौन सुखी है
जीवन-मृत्यु खेल यहीं का
फिर भी हर कोई
क्यों दुखी है
चाहत यहाँ इन्सान की क्या
भाई-भाई का हो न सका
रिश्ता एक रस्म बन गयी
जिन्दगी जाने किस
दायरे से गुजर रही
फिर क्यों कोई मन
सिसक रहा
इस बेरहम दुनिया में
बिलख रहा भूक से बालक
क्यूँ गरीब की कुटिया में खुदा
कवयत्री – सुषमा अग्रवाल