गनेश और मीनाक्षी – पहले आप – 3

कलायन पत्रिका


गनेश और मीनाक्षी – पहले आप

मथुरा कलौनी


मीनाक्षी धन्यवाद काहे का?
गनेश मेरा मूड खराब करने का।
मीनाक्षी अरे रे मूड मत खराब करो। अब मूड भी खराब कर लोगे तो तुम्हारे पास बचेगा क्या?
गनेश मैंने तुमको बोलने से टोक क्या दिया तुम तो लट्ठ ले कर पीछे ही पड़ गर्इं।
मीनाक्षी जो उज्जड होते हैं न, उनके पीछे लट्ठ ले कर भागना पड़ता है।
गनेश कान पकड़े मैंने। बहुत बड़ी गलती की जो तुमको टोका। अब बोलो तुम्हें क्या बोलना है। मैं नहीं टोकूँगा।
मीनाक्षी अब तुम अपनी गलती मान ही चुके हो तो, मैं तुम्हें पहले अपनी बात कहने के लिए आमंत्रित करती हॅूं।
गनेश नहीं पहले तुम बोलो
मीनाक्षी नहीं नहीं पहले तुम ही बोलो
गनेश लेडीज फस्र्ट।
मीनाक्षी आजकल बराबरी का जमाना है।
गनेश अच्छा बाबा, तुम जीती औेर मैं हारा। मैं ही पहले बोलता हँू
मीनाक्षी इतना सोच क्या रहे हो, बोलो।
गनेश मैं सोच रहा हूँ कि बोलूँ क्या?
मीनाक्षी वही जो बोलना चाह रहे थे।
गनेश वो तो मैं भूल गया।
मीनाक्षी गनेश तुम भी न!
गनेश तुम भी न, क्या?
मीनाक्षी कुछ नहीं। मैं चलती हॅूं।
गनेश बिना मेरी बात सुने!
मीनाक्षी वो तो तुमको याद नहीं।
गनेश मैं क्या करूँ, मेरी स्मरण शक्ति ही कमजोर है।
मीनाक्षी तुम्हारी स्मरण शक्ति को शक्ति कहना शक्ति शब्द का उपहास करना है। मैं चलती हॅूं।
गनेश तुमने जो अभी अभी कहा उसका अर्थ तो समझाती जाओ।
मीनाक्षी सोचते रहो, सुबह तक समझ में आ जाएगा।
गनेश मैं अपनी बात भूल गया, पर तुम तो अपनी बात कहती जाओ।
मीनाक्षी कल।
गनेश कल तक भूलोगी नहीं।
मीनाक्षी मुझे अपने जैेसा समझ रखा है क्या?

 

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