वह धारे पर जब भी जाती, एक टीस उभरती थी। यहीं उसने लापता होने वाले को पहली बार अच्छी तरह से देखा था …….
एक सुबह को ठीक उसी जगह उसने एक अपरिचित को लेटे हुए पाया। पास जा कर देखा तो जी धक् से रह गया। वही चेहरा था। युद्ध की विभीषिका में न जाने क्या क्या झेलना पड़ा हो……