+91 80 4372 3449
मथुरा कलौनी

वंशी दामोदरन, राधिका-1, राधिका-2, सारथी, डैनियल (डैनी)
बाईं ओर एक पलंग है जिसमें राधिका और डैनी पलंग पर अधलेटे हैं। दाहिनी ओर एक दीवान या सोफा है। सोफे में कपड़े पड़े हैं। जमीन में तीन सूटकेस हैं। एक सूटकेस में वंशी बैठा हुआ है। उसे बंद करने की चेष्टा कर रहा है। पास ही सारथी खड़ा है। पूरा स्टेज धीमें प्रकाश में है तथा कलाकार अपनी अपनी मुद्राओं में फ्रीज हैं।
दृश्य एक |
|
| राधिका और डैनी पर प्रकाश। दोनों ठठा कर हँस रहे हैं। | |
| राधिका | एक चुटकुला सुनो। |
| डैनी | चुटकुला? |
| राधिका | जोक। तो जोक यह है कि एक आदमी की बीवी, वाइफ मर गई। उसका दोस्त उसके पास गया और बोला कि मुझे बहुत दुख है कि तुम्हारी बीवी मर गई। मैं तुम्हारे दुख को समझ सकता हूँ। सब्र करो । ऊपर वाला सब ठीक कर देगा। तुम तो अभी जवान हो, क्या पता कछ समय बाद तुमको कोई लड़की जीवन साथी के रूप मिल जाय। तुम फिर से अपनी दुनिया बसा सकते हो। |
| इस पर वह आदमी बोला। | |
| डैनी | कौन, पहले वाला, जिसका वाइफ मर गया ठा। |
| राधिका | हॉं वही। वह बोला, कि दोस्त वह सब तो ठीक है पर आज रात का क्या होगा? ह्वाट एबाउट टुनाइट? |
|
डैनी हँसता है। |
|
| राधिका | हँस लो डैनी हँस लो। यह होती तुम साले मर्दो की फितरत। |
| डैनी | हे, हे, राढिका, इट्स नॉट फेयर। |
| राधिका | अबे साले तुम मुझे बतायेगा कि क्या फेयर है और क्या अनफेयर। पहले बहुत भोली थी, अब नहीं हूँ। मेरा पहला प्यार वंशी दामोदरन, कभी नहीं भूलूँगी साले को। मुझे छोड़ कर तान्या के पास गया था। जानते हो क्यों, क्यों कि तान्या बहुत ग्लैमरस थी। अमीर बाप की बेटी थी। बहुत अच्छे कनेक्शन थें उसके। मैं एक छोटे से कस्बे में पली-बढ़ी कहॉं से वह सब ग्लैमर, हाव भाव लाती। मेरे भोलेपन का फायदा उठाया था साले ने। दूसरा मिला सारथी। हम दोनों का दोस्त। वंशी के जाने के बाद उसने मुझे बताया था कि कैसे वंशी ने दिन बॉट रखे थे। वीकेंड मेरे साथ और बाकी पॉच दिन तान्या के साथ। तुम्हारी जात का ही था ना। |
| डैनी | मेरी जात का !! |
| राधिका | हॉं, वह भी मर्द था साला। (हँसती है।) |
| दोनों फ्रीज होते है। प्रकाश धीमा होता है। वंशी और सारथी पर प्रकाश आता है। | |
दृश्य दो |
|
|
वंशी और सारथी। वंशी सामान बटोर कर अटैचियों में भर रहा है। |
|
| वंशी | तू बेकार में मुझे मत फँसा हॉं। तुझे अच्छी तरह से मालूम है कि मैंने निर्णय बहुत पहले ले लिया था। बस इम्प्लीमेंट करने में देर हो रही थी। |
| सारथी | फिर भी अचानक, इस तरह! |
| वंशी | तो और किस तरह। बस दो ही तरीके हैं। या तो वह छोड़ कर जाय या मैं छोड़ कर जाऊँ। मैं ही घर छोड़ रहा हूँ। |
| सारथी | वंशी यार ये रिश्ते डिजिटल नहीं होते। एक और एक मिल कर दो नहीं होते बल्कि साली दो की खिचड़ी बन जाती है। |
| वंशी | देखो सारथी, यदि तुम मुझे नसीहत देना चाहते हो तो मत दो। |
| सारथी | कौन साला नसीहत दे रहा है। तू समझता नहीं है वंशी, राधिका मर जायेगी। वह दूसरे टाईप की लड़की है। |
| वंशी | कोई स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट नहीं हुआ था। यह एक लिव-इन रिलेशनशिप था। एक सुविधा का मिलन। एक कनवीनियेंट अरेजमेट। बस। न ज्यादा न कम। |
| सारथी | जो रिश्ता दो साल के लंबे समय तक चले वह केवल एक अरेजमेंट बन कर नहीं रह जाता। उससे आगे भी कुछ होने का दावा करता है। |
| वंशी | देखो यार, यह रिश्ता एकदम ठंडा पड़ गया है। लाइक ए फिश ऑन ए स्लैब। मरी हुई मछली की तरह। इस रिश्ते में कुछ दिन और रहे न तो साला रिश्ता बास मारने लगेगा। इसीलिये मैं इसे खतम करके यहॉं से जा रहा हूँ। |
| सारथी | लेकिन इस तरह ? |
| वंशी | तो और किस तरह? किसी न किसी तरह तो अलग होना ही है न। वह मेरी दोस्त तो रहेगी ही। बस यह लिव-इन रिश्ता नहीं रहेगा। |
| सारथी | तो क्या रह जायेगा, लिव-आउट रिलेशनशिप। कमऑन बन्धु, हम उतने भी वेस्टर्नइज्ड नहीं हुये हैं कि ‘ वी आर नो मोर लवर्स, वी आर ओन्ली फ्रेंड्स नाउएडेज’… |
| वंशी | बस कर यार सारथी… तू बहुत बोल रहा है। |
| सारथी | कम हो या ज्यादा, कैजुअल हो या लिव-इन, हिन्दी में बोलो चाहे अँग्रजी में, साला रिश्ता रिश्ता ही होता है। राधिका इस लिव-इन को परमानेंट अरेंजमेंट मान चुकी है। वंशी वह तुमको अपना पति मानती है। |
| राधिका | हाय हनी, हाय सारथी। क्या चल रहा है। मैं तो मर गयी यार। मीटिंग पर मीटिंग, कचूमर निकाल दिया मेरा। आज 11 बजे कॉल भी है। लाग-इन करना पड़ेगा। आज मैं खाना नहीं बना पाऊँगी। होमडेलिवरी से मँगाना पड़ेगा। क्या खाओगे, हनी।
|
| वंशी | केवल अपने लिये मँगाओ। मेरे लिये मत मँगाना। मैं जा रहा हूँ। |
| राधिका | तुम दोनों का कोई प्रोग्राम है क्या। ब्वायज ओनली प्रोग्राम । (हँसती है) |
| वंशी | एक्चुअली, राधिका, मुझे तुमसे एक इम्पॉर्टेंट बात करनी थी। पर तुम बात करने का मौका ही नहीं दे रही हो। |
| राधिका | हा हा डोन्ट ब्लेम मी। वैसे आजकल तुम घर पर रहते ही कहॉं हो। सुबह मेरे उठने से पहले ही तुम निकल पड़ते हो और देर रात को लौटते हो। एनीवे बोल डालो अपनी इम्पॉर्टेंट बात। आइ एम ऑल इयर्स एण्ड आई एम ऑल योर्स। अरे वंशी, तुमने अपने सूटकेस पैक कर रखे हैं । |
| वंशी | हॉं… |
| राधिका | वो भी तीन सूटकेस। यह अचानक जा कहॉं रहे हो। और कितने दिनों के लिये जा रहे हो। तीन सूटकेस! क्या भर रखा है तुमने इनमें। |
| वंशी | राधिका प्लीज थोड़ी देर के लिये चुप हो जाओ और मेरी बात सुन लो। |
| राधिका | हॉं, यस, तुम्हारी इम्पॉर्टेंट बात। बोलो। |
| वंशी | मैं यह घर छोड़ कर जा रहा हूँ। |
| राधिका | छोड़ के जा रहा हूँ माने, हम नये घर में शिफ्ट होने वाले हैं। ओ तो यह थी तुम्हारी इम्पॉर्टेंट बात। |
| वंशी | हम नहीं केवल मैं। |
| राधिका | वंशी, तुम क्या कह रहे हो मेरी समझ में नहीं आ रहा है। |
| वंशी | इसमें न समझ में आनेवाली कोई बात ही नहीं है। मैं आज तुम्हारा साथ छोड़ कर जा रहा हूँ। ठीक है। तुम्हें कोई चीज की जरूरत हो बेझिझक मुझे कॉल कर लेना। मैं इसी शहर में रहूँगा। ओके। अपना ख्याल रखना। |
| राधिका | वंशी तुम यह क्या कह रहे हो, क्या कर रहे हो। मुझे छोड़ कर जा रहे हो! जस्ट लाइक दैट। |
| वंशी | नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है। मैं कई दिन से तुमसे कहने की कोशिश कर रहा था, मौका ही नहीं मिला। |
| राधिका | वंशी…मैं…तुम… तुम्हारे बिना मैं क्या करूँगी। |
| वंशी | वही कर सकती हो जो मुझसे मिलने से पहले करती थी। |
| राधिका | वंशी मत जाओ। सब ठीक हो जायेगा। दो साल से हम साथ साथ हैं पति पत्नी की तरह। |
| वंशी | राधिका यह पति पत्नी का रिश्ता बीच में मत लाओ। यहॉं कोई पति पत्नी का रिश्ता नहीं था। यह एक सुविधा का रिश्ता था। लिव-इन रिलेशनशिप। अब इस रिश्ते में नयापन नहीं है। हम अब एक दूसरे को बोर करते हैं इसलिये इसे यहीं खतम करते हैं। |
| राधिका | कहॉं जा रहे हो? |
| वंशी | मैं तान्या के साथ शिफ्ट हो रहा हूँ। |
| बाहर टैक्सी की आवाज। | |
| राधिका | नहीं, तुम नहीं जा सकते वंशी। मत जाओ। सारथी वंशी को रोको। रोको इसको सारथी। |
| जाता है। | |
| सारथी | वह नहीं रुकेगा राधिका। अपनी पूरी कोडिंग करके आया है। अब वह अपने लिव-इन रिलेशनशिप वर्शन 3 में चला गया है। |
| राधिका | क्या कहा लिव-इन रिलेशनशिप वर्शन 3? |
| सारथी | हॉं, तुम उसकी लिव-इन रिलेशनशिप वर्शन 2 थी। वर्शन 1 फ्लोरिडा की कोई सिंडी थी। |
| राधिका | उसने कभी बताया ही नहीं। |
| सारथी | इसमें बताने वाली बात क्या थी। समझदारी तो इसी में है कि जहॉं तक हो सके पुरानी गर्लफ्रैंड की जिक्र न किया जाय। |
| राधिका | सारथी, मैं तो बहुत दूर चली आई थी वंशी के साथ। फिजिकली, इमोशनली। (रोती है) |
| फेरे नहीं लिये तो क्या हुआ? दो साल… वैसे तो बहुत कहते हैं मर्द की जबान, यहॉं पर क्या हो गई मर्द की जबान। उसी जबान से अब वह तान्या के तलुए चाट रहा है!! | |
| सारथी | तुम उससे शायद कुछ ज्यादा ही एक्सपेक्ट कर रही थी। उसने तुमसे शादी करने का कभी कोई वचन तो नहीं दिया था। |
| राधिका | मना भी तो नहीं किया था सारथी। मना भी तो नहीं किया था। मैंने तो कभी अपनी भावनाओं को नहीं छिपाया। फ्रैन्ड सर्कल में तो सभी माने बैठे थे कि हम दोनों शादी कर रहे हैं। तब तो वह कुछ नहीं बोला। इसका मैं क्या मतलब लगाती। यही न ‘ मौनम् स्वीकृति लक्षणम्।‘ |
|
राधिका पर स्पॉट। रोती है। फेड आउट |
|
दृश्य तीन |
|
| राधिका | जानते हो डैनी, उस समय मैं गधी थी। मैं ही वंशी के मौन का मतलब नहीं पढ़ पाई थी। उस उल्लू के पटठे के प्यार में पड़ गई थी। |
| डैनी | राढिका, डोन्ट बी सो हार्श ऑन योरसेल्फ। प्यार, लव कितना वंडरफुल फीलिंग है। |
| राधिका | बुलशिट। |
| राधिका | वंशी के जाने के बाद साले सारथी ने सोफे में डेरा जमा दिया। तीन दिन तक उसे झेलती रही। वह जाये ही नहीं। बात बात पर करीब आना। खींच कर गले लगाना। पीठ थपथपाते हुये कमर पकड़ना.. पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। इधर मेरी दुनिया लुट गई थी और आइ वाज कम्लीटली शैटरड। और इधर ये जनाब अपनी खिचड़ी पकाने में लगे हुये थे। |
| डैनी | खिचड़ी पका कि नहीं। |
| राधिका | चार दिन तक उसने सोफे में रात बिताई। पॉंचवे दिन मैंने उसे बेडरूप में बुला लिया। कुत्ते की तरह जीभ लपलपाता हुआ दौड़ता हुआ आया था। |
| डैनी | तो मैं तुम्हारा तीसरा लिव-इन हूँ। |
|
राधिका |
कितने आये कितने गये, नंबर मुझे याद नहीं। याद रखने की कोई जरूरत भी नहीं। बस वह अल्हड़ मासूम राधिका कहीं गुम हो गई है। मैं, मुझे तो मर्दों की आदत पड़ गई है। लिव-इन रिलेशनशिप की सैंक्टिटी है। अब मेरे लिये मर्द बस स्लीपिंग पिल्स की तरह हैं। |
समाप्त |
|