Home
ट्रैक सूट
ट्रैक सूट – 2

ट्रैक सूट – 2

कलायन पत्रिका


एक व्यंग्य रचना

सुजाता शुक्ला

खेलों में मेरी रुचि नहीं है। वैसे देखा जाय तो खेलों में ऐसा रखा ही क्या है कि उनमें किसी को रुचि पैदा करने की आवश्यकता पड़े। हरेक खेल में एक बॉल या गेंद होती है, जिसे खेल मे नाम पर कोई लतियाता है तो कोई डंडे से मारता है। बस, लगी रहती हैं दो टीमें एक गेंद के पीछे। ऐसे दृश्य में कोई आनंद खोज पाना मेरे वश में नहीं था। मैंने देविका से कहा भी था, पर वह कहाँ सुनने वाली हुई। बस, हर छोटे-बड़े खेल में मुझे ले जाती थी। मुझे अपने साँचे में ढालने की कोई तरकीब उसने नहीं छोड़ी थी। मैं भी करता गया, जो वह कहती गई। उससे प्यार का इजहार करने का प्रायश्चित तो करना ही था।

बस, एक जगह देविका फेल हो गई। वह मुझे सुबह-सुबह नहीं दौड़ा पाई। मैं समय पर कभी उठ ही नहीं पाता था। देविका को ऐसा पति स्वीकार्य नहीं था, जो सुबह नहीं दौड़ता हो। उसने संबंध विच्छेद कर दिया और मैंने राहत की साँस ली।

और अब उसने मुझे सुबह टहलते देखा। मुझे घर तक पहुँचाने आई। इतवार को मुझे गॉल्फ के लिए ले जाएगी। जिस कोण से भी देखो, खतरा ही खतरा! कैसी दृष्टि से देख रही थी वह मुझे। याद करते ही बदन में झुरझुरी हो रही थी।

ऐसा नहीं है कि मैने प्रेम को एकदम भुला दिया है। प्रेम कहिए या प्यार, वही तो था जिसने मुझे मजबूर किया था कि मैं देविका से कहूँ कि मैं उससे प्यार करता हूँ। आखिर है क्या यह प्यार? मेरे हिसाब से प्यार एक भावनात्मक क्षण है। आज से सहरुाों वर्ष पहले जब प्यार का आविष्कार हुआ था तब लोगों के पास कामकाज तो अधिक था नहीं। पूरा का पूरा जीवन होता था उनके सामने, भावना में बहने के लिए। तभी शायद कहा गया होगा कि प्रेम ही जीवन है। पर आजकल की भागमभाग में प्रेम के लिए केवल क्षण ही उपलब्ध है। लड़का-लड़की, भावना, वातावरण आदि जब सही मात्रा में मिक्स होते हैं तो झट से प्यार हो जाता है। अगले ही क्षण जब वातावरण में किसी भी कारण थोड़ा भी बदलाव आता है तो मिक्सचर बिगड़ जाता है। मिक्सचर बिगड़ा तो प्यार समाप्त। आप समझ गए होंगे कि एक समय तब था जब मुझे देविका से प्यार हुआ था। और एक समय अब है जब मुझे देविका से प्यार नहीं है।

अभी परिस्थिति यह थी कि मिक्सचर देविका के लिए एकदम सही हो रहा था और उसे मुझ पर प्यार आ रहा था। इस मिक्सचर का महत्वपूर्ण अंग था मेरा ट्रैक सूट।

ट्रैक सूट की ऐसी की तैसी! मैंने निर्णय लिया, प्रात: भ्रमण बंद। तुरंत।

वह ट्रैक सूट मैंने बिसन सिंह को दे दिया। बिसन सिंह देविका के खेतों में काम करता है। मेरा भी बहुत काम कर देता है, इसलिए मैंने वह ट्रैक सूट उसे दे दिया। बिसन सिंह ट्रैक सूट लेने को तैयार ही नहीं हो रहा था। कह रहा था कि ट्रैक सूट लेकर क्या करेगा? वह ट्रैक सूट पहनेगा तो लोग उस पर हँसेंगे। राह चलते कुत्ते उस पर भैंकेंगे। पर मैंने जबरदस्ती उसे ट्रैक सूट थमा ही दिया।

कुछ दिनों के बाद मैं क्या देखता हूँ, कि देविका के खेत में जानवरों को डराने के लिए जो पुतला खड़ा था, वह मेरा वही ट्रैक सूट पहने हुए था।

पीछे 

Powered By Indic IME